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हापुड़।
इस सप्ताह धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण संयोग बन रहे हैं। एकादशी व्रत, प्रदोष व्रत, वृष संक्रांति, शनि जयंती, शनि अमावस्या और वट सावित्री व्रत जैसे बड़े पर्वों के साथ 17 मई रविवार से पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का भी शुभारंभ हो जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह पूरा सप्ताह पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा के अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के सी पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि इस बार ग्रह-नक्षत्रों के विशेष योग के कारण सप्ताह का प्रत्येक दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को इन शुभ अवसरों का लाभ उठाकर व्रत, दान, जप, तप और भगवान की आराधना करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अपरा एकादशी तिथि 12 मई को अपराह्न 2 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होकर 13 मई को दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। ऐसे में शास्त्र सम्मत रूप से अपरा एकादशी का व्रत 13 मई बुधवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और व्रत करने से समस्त पापों का नाश होकर पुण्य की प्राप्ति होती है।
पंडित के सी पाण्डेय ने बताया कि त्रयोदशी तिथि 14 मई को सुबह 11 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ होकर 15 मई की सुबह 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि प्राप्त होने के कारण प्रदोष व्रत 14 मई गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाएगी तथा व्रती महिलाएं संध्या बेला में विधि-विधान से पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।
उन्होंने कहा कि 15 मई शुक्रवार को वृष संक्रांति का पुण्यकाल रहेगा। इस अवसर पर श्रद्धालु गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करेंगे। संक्रांति पर तिल, वस्त्र, अन्न और धन का दान विशेष फलदायी माना गया है। पंडित के सी पाण्डेय ने बताया कि 16 मई शनिवार का दिन कई महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों का साक्षी बनेगा। इस दिन शनि जयंती, शनि अमावस्या और वट सावित्री व्रत एक साथ पड़ रहे हैं। विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ वट वृक्ष का पूजन करेंगी। वहीं शनि जयंती पर भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालु शनि दोषों से मुक्ति की कामना करेंगे। मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और भंडारों का आयोजन भी होगा।
उन्होंने कहा कि 17 मई रविवार से पुरुषोत्तम मास प्रारंभ हो जाएगा, जिसे अधिक मास भी कहा जाता है। सनातन धर्म में इस मास को भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। इस दौरान विवाह, जनेऊ, मुंडन, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य एक माह तक बंद रहेंगे। हालांकि कथा, भागवत, हवन, मंत्र जाप, दान, भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान पूरे पुरुषोत्तम मास में किए जाते रहेंगे। पंडित के सी पाण्डेय काशी वाले ने कहा कि पुरुषोत्तम मास आत्मशुद्धि, तप और भक्ति का महीना माना जाता है। इस माह में किया गया दान और भगवान विष्णु का पूजन कई गुना फल प्रदान करता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस पूरे सप्ताह और आगामी पुरुषोत्तम मास में धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लें और पुण्य लाभ अर्जित करें।
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