हापुड़।
त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव समय से न होने और प्रदेश में जनगणना कार्य जारी रहने के बीच पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल विस्तार की मांग अब तेज होने लगी है। सोमवार को पश्चिम उत्तर प्रदेश ग्रामीण सत्ता पंचायती राज संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष इकबाल प्रधान के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर वर्तमान ग्राम प्रधानों एवं पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाए जाने की मांग उठाई।
ज्ञापन में कहा गया कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण प्रशासन और विकास योजनाओं की रीढ़ हैं। वर्तमान समय में पंचायत चुनावों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जबकि दूसरी ओर जनगणना जैसा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य भी चल रहा है। ऐसे में यदि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होता है तो ग्राम स्तर पर प्रशासनिक शून्यता उत्पन्न हो सकती है, जिससे विकास कार्यों और जनहित योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि वर्तमान ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य एवं अन्य पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल तब तक यथावत रखा जाए, जब तक नए चुनाव संपन्न होकर नवनिर्वाचित प्रतिनिधि कार्यभार ग्रहण न कर लें। साथ ही कार्यकाल विस्तार अवधि में सीमित प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार भी दिए जाएं, ताकि पंचायतों में विकास कार्य, पेंशन, आवास, राशन वितरण, स्वच्छता, पेयजल और जनगणना संबंधी कार्य सुचारू रूप से चलते रहें।
प्रदेश उपाध्यक्ष इकबाल प्रधान ने कहा कि ग्राम पंचायतें केवल संवैधानिक व्यवस्था नहीं बल्कि ग्रामीण भारत की सबसे मजबूत लोकतांत्रिक इकाई हैं। आज गांवों में सरकार की अधिकांश योजनाएं पंचायतों के माध्यम से ही धरातल पर पहुंचती हैं। यदि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो जाता है तो गांवों में विकास योजनाओं की गति रुक जाएगी और जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जनगणना जैसा राष्ट्रीय महत्व का कार्य चल रहा है, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका बेहद अहम है। ग्राम प्रधान और पंचायत प्रतिनिधि गांव के हर परिवार, हर वार्ड और हर व्यवस्था से सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में उनके अनुभव और समन्वय के बिना जनगणना कार्य भी प्रभावित हो सकता है।
इकबाल प्रधान ने कहा कि संगठन की मांग पूरी तरह जनहित और प्रशासनिक सततता को ध्यान में रखकर की गई है। पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल विस्तार लोकतंत्र के खिलाफ नहीं बल्कि एक अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था होगी, जिससे गांवों में शासन और जनता के बीच समन्वय बना रहेगा। उन्होंने कहा कि चुनाव संपन्न होते ही नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को विधिवत कार्यभार सौंप दिया जाएगा। उन्होंने प्रदेश सरकार और राज्यपाल से मांग करते हुए कहा कि ग्रामीण विकास, जनगणना और जनकल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल विस्तार पर सहानुभूतिपूर्वक सकारात्मक निर्णय लिया जाए, ताकि गांवों में प्रशासनिक व्यवस्था और विकास कार्य प्रभावित न हों।

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