HALCHAL INDIA NEWS

हापुड़। 

अंतरराष्ट्रीय हालात और खाड़ी देशों में सप्लाई प्रभावित होने का असर अब स्थानीय मेडिकल बाजार पर दिखने लगा है। कच्चे माल की कमी और परिवहन लागत बढ़ने के कारण दवाइयों और सर्जिकल सामानों की कीमतों में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक इजाफा हो गया है, जिससे कारोबारियों और मरीजों दोनों की चिंता बढ़ गई है।

मेडिकल व्यापारियों के अनुसार दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और उसकी कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। पेट्रोल और गैस के दाम बढ़ने से उत्पादन, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी बढ़ गया है, जिसका असर सीधे बाजार पर पड़ रहा है।

बाजार में कैनुला, आईवी फ्लूइड, ग्लव्स, थर्मामीटर और एक्स-रे फिल्म जैसे जरूरी सर्जिकल आइटम महंगे हो गए हैं। वहीं ग्लूकोज की बोतलों के दाम में भी लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

दवा कारोबारी निखिल कुमार का कहना है कि कई जरूरी मेडिकल सामान के दाम 15 से 20 फीसदी तक बढ़ चुके हैं, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है और ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।