HALCHAL INDIA NEWS
हापुड़।
विधानसभा क्षेत्रों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से जुड़े अजीब-अजीब मामले सामने आ रहे हैं। मंगलवार को नगर पालिका सभागार में नोटिसों की सुनवाई के दौरान एक महिला का मामला अधिकारियों के लिए भी चौंकाने वाला रहा।
रेलवे रोड क्षेत्र की रहने वाली महिला नोटिस का जवाब देने आवश्यक दस्तावेज लेकर पहुंची थीं, लेकिन कागजातों में नाम अलग-अलग दर्ज होने के कारण उनकी मुश्किलें बढ़ गईं। नोटिस में महिला का नाम कुछ और था, जबकि शैक्षणिक व पहचान पत्रों में अलग नाम दर्ज मिला।
सुनवाई कर रहे एआरटीओ प्रवर्तन रमेश कुमार चौबे ने जब नाम में अंतर का कारण पूछा तो महिला ने बताया कि विवाह से पहले उनका नाम कुछ और था, लेकिन शादी के बाद ससुराल पक्ष द्वारा उनका नाम बदल दिया गया। आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र नए नाम से बन गए, जबकि हाईस्कूल की मार्कशीट पुराने नाम से ही है।
अधिकारी ने नाम परिवर्तन से जुड़ी वैधानिक घोषणा या प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन महिला के पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं था। आवश्यक कागजात न होने के कारण वह जवाब दाखिल किए बिना लौटने को मजबूर हो गईं।
सिर्फ यही नहीं, मंगलवार को नगर पालिका सभागार, एसडीएम कार्यालय और डायट परिसर में बड़ी संख्या में लोग नोटिस का जवाब देने पहुंचे, जहां दस्तावेजों में त्रुटियों के चलते अधिकांश को बार-बार चक्कर लगाने पड़े।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर अभियान के अंतर्गत जिले में लगभग 1.27 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं। मतदाताओं की मैपिंग में गड़बड़ी के कारण यह कार्रवाई की गई है। इन मामलों की सुनवाई के लिए जिले में 51 अधिकारी तैनात किए गए हैं।
राजनीतिक दलों का कहना है कि जारी किए गए नोटिसों में करीब 60 प्रतिशत महिलाएं हैं, विशेष रूप से वे महिलाएं जिनका विवाह वर्ष 2003 के बाद हुआ है। नाम, पता और पहचान से जुड़े बदलाव इनके लिए सबसे बड़ी परेशानी बन रहे हैं।
इसी दौरान जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने नगर पालिका सभागार और एसडीएम कार्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण में यह सामने आया कि नायब तहसीलदार पवन कुमार बिना अनुमति के अवकाश पर चले गए हैं। एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण कार्य के बीच अनुपस्थित रहने पर डीएम ने नाराजगी जताई और फोन पर फटकार लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
.jpg)




.jpeg)
.jpeg)

.jpeg)



Social Plugin