हापुड़।
जिले में बिजली सुधार के लिए अब तक 200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं, लेकिन हालत अभी भी जर्जर खंभों और असुरक्षित तारों की वजह से चिंताजनक बने हुए हैं। कई पिछड़ी बस्तियों में बिजली अभी भी पुराने बल्लियों और अस्थायी व्यवस्था के सहारे दी जा रही है।
घनी आबादी वाले क्षेत्रों में टेढ़े-मेढ़े खंभे खड़े हैं और कटे-फटे ट्रांसफार्मर की तारें लोगों के लिए खतरा बनी हुई हैं। बिजली विभाग की योजनाओं के तहत रिवँप परियोजना में 150 करोड़ रुपये और बिजनेस प्लान में 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य पुराने खंभों और तारों को बदलना और ट्रांसफार्मरों का रख-रखाव करना है।
हालांकि आधिकारिक रिपोर्ट में 80 प्रतिशत कार्य पूरा बताया गया है, लेकिन धरातल पर स्थिति अब भी सुधार की प्रतीक्षा कर रही है।
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