HALCHAL INDIA NEWS
हापुड़।
मोनाड विश्वविद्यालय में छात्रवृत्ति वितरण से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। जांच में सामने आया है कि बीते लगभग 14 वर्षों के दौरान विश्वविद्यालय ने हजारों छात्रों के अभिलेखों में हेरफेर कर करीब 53 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि का दुरुपयोग किया। आरोप है कि सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को अनुसूचित जाति दर्शाकर सरकारी धन प्राप्त किया गया।
इस प्रकरण की पड़ताल सात सदस्यीय जांच टीम ने करीब सात महीने तक की। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने विश्वविद्यालय को ब्लैक लिस्ट करने और इसकी मान्यता समाप्त करने की संस्तुति शासन को भेज दी है। साथ ही विश्वविद्यालय के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू करने की तैयारी है।
मामले की शुरुआत तब हुई जब विश्वविद्यालय में फर्जी अंकतालिका से जुड़ा प्रकरण सामने आया। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर छात्रवृत्ति में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। इस विषय को मीडिया में प्रमुखता से उठाए जाने के बाद शासन ने संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।
इसके पश्चात 9 जून को संयुक्त निदेशक (मेरठ) और जिला समाज कल्याण अधिकारी हापुड़ को जांच सौंपी गई। जांच के दौरान नौ बिंदुओं पर तथ्य जुटाए गए। रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों की उपस्थिति से संबंधित फर्जी अभिलेख तैयार किए गए और एससी, एसटी व सामान्य वर्ग के डाटा में कूटरचना की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि शैक्षिक सत्र 2012-13 से 2024-25 के बीच कई सामान्य वर्ग के छात्रों को अनुसूचित जाति/जनजाति श्रेणी में दिखाकर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के आवेदन कराए गए। इससे सरकारी धन के गबन की पुष्टि हुई है।
जिलाधिकारी ने जनपदीय छात्रवृत्ति स्वीकृति समिति की संस्तुति के बाद समाज कल्याण विभाग के निदेशक को पत्र भेजकर विश्वविद्यालय को काली सूची में शामिल करने और मान्यता निरस्त करने की अनुशंसा की है। कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में शासन और जिला स्तर पर कानूनी कार्रवाई भी प्रस्तावित है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवकुमार ने बताया कि इस मामले की पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। मोनाड विश्वविद्यालय का नाम मास्टर डाटा से हटाया जाएगा और ब्लैक लिस्ट किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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