HALCHAL INDIA NEWS
हापुड़।
मोबाइल गेम और ऑनलाइन वीडियो की बढ़ती आदत अब बच्चों और किशोरों की सेहत के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। स्कूल से लौटने के बाद बच्चे देर रात तक फोन में लगे रहते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई, व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे लंबे समय तक अकेले और वर्चुअल दुनिया में उलझने के कारण मानसिक रूप से गुमशुम और अलग-थलग हो रहे हैं। मनोरोग विभाग में आने वाले बच्चों और किशोरों में ऐसे लक्षण देखे जा रहे हैं, जिन्हें “वर्चुअल ऑटिज्म” जैसी समस्या के संकेत माना जा रहा है।
हापुड़ सीएचसी की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. हनीफा बेगम बताती हैं कि छोटे वीडियो और रील लगातार दिमाग को उत्तेजित करते हैं। इससे मस्तिष्क इसकी आदत डाल लेता है और बच्चों में सामान्य गतिविधियों में रुचि कम हो जाती है।
इसका असर बच्चों के पढ़ाई के मन, मूड स्विंग, गुस्सा, जिद्दीपन और अकेलेपन में दिख रहा है। वहीं महिलाएं भी परिवार और जिम्मेदारियों से कटाव महसूस कर रही हैं। अधिक स्क्रीन टाइम से थकान, सिरदर्द, आंखों में जलन और मानसिक तनाव जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि बच्चों को मोबाइल और गेम की लत से बाहर लाने के लिए परिजन उनके साथ अधिक समय बिताएं और उन्हें खेल-कूद व अन्य गतिविधियों की ओर प्रेरित करें।
.jpg)





.jpeg)
.jpeg)

.jpeg)



Social Plugin