हापुड़।
विश्व सनस्क्रीन दिवस के अवसर पर सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ के त्वचा रोग विभाग की ओर से व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाव, त्वचा स्वास्थ्य की सुरक्षा और निवारक त्वचा रोग देखभाल के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में चिकित्सकों, मेडिकल विद्यार्थियों, स्वास्थ्यकर्मियों तथा मरीजों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का आयोजन त्वचा रोग विभाग की विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. दीप्ति सक्सेना के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सनस्क्रीन केवल सौंदर्य प्रसाधन नहीं, बल्कि त्वचा को फोटो डैमेज और पर्यावरणीय प्रभावों से बचाने वाला एक महत्वपूर्ण चिकित्सीय सुरक्षा उपाय है। भारत जैसे देश में, जहां अधिकांश समय लोग तेज धूप के संपर्क में रहते हैं, वहां सन प्रोटेक्शन के प्रति जागरूकता बेहद आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि लंबे समय तक बिना सुरक्षा के धूप में रहने से त्वचा पर समय से पहले झुर्रियां, टैनिंग, पिगमेंटेशन, सनबर्न, रंग में असमानता और गंभीर मामलों में त्वचा कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में नियमित रूप से उपयुक्त एसपीएफ युक्त सनस्क्रीन का प्रयोग बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों और त्वचा रोग विशेषज्ञों ने मरीजों एवं उनके परिजनों को सनस्क्रीन लगाने की सही विधि, उपयुक्त एसपीएफ के चयन तथा समय-समय पर दोबारा सनस्क्रीन लगाने की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही सनस्क्रीन से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए बताया गया कि इसका उपयोग केवल गर्मियों में ही नहीं, बल्कि हर मौसम और बादलों वाले दिनों में भी किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को निःशुल्क सनस्क्रीन सैंपल वितरित किए गए। चिकित्सकों ने लोगों को सुरक्षात्मक कपड़े पहनने, धूप का चश्मा, टोपी और छाते का प्रयोग करने तथा दोपहर के समय तेज धूप से बचने की सलाह दी। कार्यक्रम का आयोजन संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. जे. रामचंद्रन तथा उपाध्यक्ष रम्या रामचंद्रन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। संस्थान की प्राचार्य डॉ. बरखा गुप्ता, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मेजर जनरल सी.एस. आहलूवालिया, सीनियर एडवाइजर ब्रिगेडियर डॉ. आर.के. सहगल, जनरल मैनेजर एन. वर्धराजन और निदेशक रघुवर दत्त सहित प्रशासनिक अधिकारियों का विशेष सहयोग रहा।
अंत में त्वचा रोग विभाग की ओर से सभी संकाय सदस्यों, रेजिडेंट्स, कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम ने एक बार फिर सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ की जनस्वास्थ्य जागरूकता और निवारक चिकित्सा सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूती से प्रदर्शित किया।
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