हापुड़।
जन शिकायतों के निस्तारण को लेकर संचालित एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) में अनियमितताओं की आशंका के बाद शासन ने जिले में पिछले एक वर्ष के दौरान निपटाए गए मामलों की पुनः जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत हजारों शिकायतों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
शासन स्तर पर शिकायतकर्ताओं से प्राप्त फीडबैक और जांच रिपोर्टों में यह संकेत मिले हैं कि कई मामलों का समाधान केवल अभिलेखों में दर्शाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर समस्याएं बनी रहीं। इसी को देखते हुए संबंधित मामलों की दोबारा जांच कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रशासन को भेजे गए निर्देशों के अनुसार सभी लंबित और चिन्हित मामलों की समीक्षा निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करनी होगी। जांच प्रक्रिया की जिम्मेदारी संबंधित तहसीलों के अधिकारियों को सौंपी गई है, जो शिकायतों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करेंगे।
इस बार जांच प्रक्रिया में तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा। प्रशासन को विशेष एआई आधारित उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिनकी मदद से शिकायत निस्तारण की गुणवत्ता और वास्तविकता का आकलन किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर राजस्व विभाग के विभिन्न स्तरों के अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यों का मूल्यांकन भी किया जा सकता है।
अधिकारियों के अनुसार भूमि विवादों से जुड़े मामलों में सबसे अधिक अनियमितताएं सामने आई हैं। इनमें सरकारी भूमि पर कब्जा, रास्तों और चकरोड से जुड़े विवाद, नालियों पर अतिक्रमण, तालाबों की भूमि, पट्टा भूमि तथा अन्य राजस्व संबंधी शिकायतें प्रमुख रूप से शामिल हैं।
जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जांच कार्य पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ किया जाए। लापरवाही या गलत रिपोर्टिंग पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई भी की जा सकती है।
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