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नलकूप बिल घोटाले पर शासन की नजर, अपर मुख्य सचिव ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट


HALCHAL INDIA NEWS

हापुड़। 

जिले में लंबे समय से चर्चा में चल रहे नलकूप बिल घोटाले के मामले में अब शासन स्तर पर सक्रियता बढ़ गई है। करीब 220 करोड़ रुपये से जुड़े इस प्रकरण को लेकर अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) ने संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद जिला प्रशासन और ऊर्जा निगम के अधिकारियों को मामले की जांच और किसानों को राहत देने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।



जानकारी के अनुसार वर्ष 2004 में नलकूप बिल से जुड़ा बड़ा वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था। आरोप है कि किसानों से वसूली गई राशि को सरकारी खजाने में जमा करने के बजाय कुछ कर्मचारियों ने गबन कर लिया था। मामले को छिपाने के लिए रिकॉर्ड नष्ट करने और रसीद बुकों को गायब करने के प्रयास भी किए गए थे। तब से यह मामला जांच के दायरे में बना हुआ है।

ऊर्जा निगम ने अब प्रभावित किसानों की समस्या के समाधान के लिए एक पोर्टल तैयार कराया है, जिस पर 700 से अधिक किसानों ने अपनी जमा रसीदें और शपथ पत्र जमा किए हैं। मेरठ मुख्यालय से अधिकारी समय-समय पर हापुड़ पहुंचकर पुराने रिकॉर्ड और नए बिलों की जांच कर रहे हैं, ताकि सही बिल तैयार कर किसानों को राहत दी जा सके।

हाल ही में डीजीएम फाइनेंस अमित रोहेला टीम के साथ अतरपुरा स्थित डिवीजन कार्यालय पहुंचे और तैयार किए गए बिलों के प्रारूप की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान कुछ त्रुटियां मिलने पर अधिकारियों को उन्हें ठीक करने के निर्देश दिए गए, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

अधिशासी अभियंता सचिन द्विवेदी ने बताया कि नलकूप किसानों के गलत बिलों को ठीक करने का काम तेजी से चल रहा है। मेरठ एमडी कार्यालय की टीम रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही है और जल्द ही किसानों को राहत देने की दिशा में ठोस कार्रवाई की जाएगी।