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नई पीढ़ी ने किया किनारा, हैंडलूम नगरी में श्रमिकों का टोटा

HALCHAL INDIA NEWS

पिलखुवा। हैंडलूम नगरी पिलखुवा का कपड़ा उद्योग इन दिनों कुशल श्रमिकों की भारी कमी से जूझ रहा है। चादर, गमछा, बेडशीट और होटल लिनन की बढ़ती मांग के बावजूद उद्योगों को समय पर ऑर्डर पूरे करने में परेशानी हो रही है। उद्योग जगत का कहना है कि नई पीढ़ी का पारंपरिक हैंडलूम और टेक्सटाइल कार्यों से लगातार मोहभंग हो रहा है, जिससे प्रशिक्षित और अनुभवी कारीगरों का अभाव बढ़ता जा रहा है।

नगर और आसपास के क्षेत्रों में 500 से अधिक छोटी-बड़ी हैंडलूम एवं टेक्सटाइल इकाइयां संचालित हैं, जिनसे करीब 20 हजार लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और बड़े शहरों से लगातार ऑर्डर मिलने के बावजूद श्रमिकों की कमी उद्योग के विकास में बड़ी बाधा बन रही है।

उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार नई पीढ़ी पावरलूम और टेक्सटाइल क्षेत्र में रोजगार तलाशने के बजाय अन्य व्यवसायों और नौकरियों को प्राथमिकता दे रही है। इसका सीधा असर उत्पादन क्षमता पर पड़ रहा है और इकाइयों को पर्याप्त कार्यबल नहीं मिल पा रहा है।

इन कारीगरों की सबसे ज्यादा कमी

उद्योग संचालकों का कहना है कि वर्तमान में पावरलूम ऑपरेटर, फिनिशिंग कर्मचारी, सिलाई कारीगर, पैकिंग स्टाफ और डिजाइन डेवलपमेंट कर्मचारियों की सबसे अधिक कमी है। कुशल कारीगरों के अभाव में उत्पादन प्रभावित हो रहा है और कई बार ऑर्डर समय पर पूरे करना चुनौती बन जाता है।

व्यापारियों का मानना है कि यदि युवाओं को इस क्षेत्र से जोड़ने और उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण देने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाले समय में पिलखुवा के प्रसिद्ध हैंडलूम उद्योग को और गंभीर श्रमिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।