HALCHAL INDIA NEWS
हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण (एचपीडीए) द्वारा 2000 में स्थापित पिलखुवा टेक्सटाइल सिटी में फैक्टरियों से निकलने वाले केमिकलयुक्त अपशिष्ट जल का शोधन अपेक्षित ढंग से नहीं हो पा रहा है। कॉमन ट्रीटमेंट एफ्लुएंट प्लांट (सीईटीपी) के बावजूद कई प्लॉटों में पानी खुला जमा हो रहा है, जिससे आसपास के भूजल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं।
सीईटीपी की वास्तविक स्थिति
टेक्सटाइल उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को शुद्ध करने के लिए 2.5 एमएलडी क्षमता वाला सीईटीपी लगाया गया था। लेकिन अक्सर प्लांट अचानक बंद हो जाता है और जल का बहाव सीधे खुले नालों और खाली प्लॉटों में हो रहा है। इससे न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि आसपास की जमीन और जल स्रोत भी दूषित हो रहे हैं।
उद्यमियों की शिकायत
उद्यमियों ने बताया कि पहले भी कई बार शोधन यंत्र खराब हो चुका है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसके कारण टेक्सटाइल सिटी में उद्योगों को पानी शोधन की पूरी सुविधा नहीं मिल पा रही है।
सरकारी प्रतिक्रिया
एचपीडीए के सचिव अमित कादियान ने कहा कि सीईटीपी चालू है और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। यदि किसी क्षेत्र में नाला या सीवर लाइन में समस्या है, तो निरीक्षण कर उसे ठीक कराया जाएगा।
इस स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि योजनाओं के दावे और जमीन पर लागू होने वाली हकीकत में अभी भी अंतर मौजूद है, और अपशिष्ट जल प्रबंधन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
.jpg)





.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)




Social Plugin