हापुड़।
शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है, लेकिन समस्या के समाधान के प्रयास अभी तक अधूरे हैं। कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने की योजना कागजों में ही अटकी हुई है, क्योंकि इसके लिए जमीन का चयन नहीं हो सका है।
हालात यह हैं कि रोजाना कई लोग कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं। खासतौर पर बच्चे और महिलाएं ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें शारीरिक के साथ-साथ मानसिक और आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
योजना के अनुसार शेल्टर होम बनने के बाद कुत्तों को पकड़कर उनका बंध्याकरण और टीकाकरण किया जाना है, लेकिन जमीन तय न होने से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। उधर, शहर के कई इलाकों में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।
नगर पालिका द्वारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए टेंडर प्रक्रिया कई बार शुरू की गई, लेकिन विभिन्न कारणों से यह काम पूरा नहीं हो पाया। भुगतान से जुड़ी समस्याएं भी इसमें बाधा बन रही हैं।
हाल ही में एक छोटी बच्ची पर हुए हमले ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। बच्ची को गंभीर चोटें आईं और उसे बेहतर इलाज के लिए बाहर रेफर करना पड़ा। फिलहाल उसकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि शेल्टर होम के लिए जमीन की तलाश जारी है। जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, कुत्तों के बंध्याकरण और नियंत्रण के लिए अभियान शुरू किया जाएगा।
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