HALCHAL INDIA NEWS
गढ़मुक्तेश्वर। गर्मी का मौसम शुरू होते ही बेल के फल और उससे बनने वाले शर्बत की मांग बढ़ने लगती है, लेकिन इस समय बेल के पेड़ों में एक बीमारी देखने को मिल रही है। जिले के कुछ क्षेत्रों में बेल के छोटे फल काले होकर समय से पहले गिर रहे हैं, जिससे किसानों को नुकसान की आशंका है।
कृषि विभाग के वरिष्ठ प्राविधिक सहायक सतीश चंद्र शर्मा के अनुसार जिले के उपेड़ा, ब्रजनाथपुर बछलौता, बदरखा, बिहूनी और खादर इलाके में कुछ स्थानों पर बेल के बाग मौजूद हैं। इसके अलावा कई गांवों में घरों के पास भी बेल के पेड़ लगे हुए हैं।
उन्होंने बताया कि मार्च और अप्रैल के दौरान कई बार बेल के छोटे फल काले पड़कर नीचे गिरने लगते हैं। साथ ही पेड़ों की नई पत्तियां सूखने लगती हैं और पत्तों पर काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं। इससे धीरे-धीरे पेड़ कमजोर होने लगता है और हरे फल भी टूटकर गिर सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह समस्या फफूंदी के संक्रमण के कारण होती है। इससे बचाव के लिए फल छोटे होने पर ही कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करना लाभकारी माना जाता है।
इसके अलावा यदि हरे फल समय से पहले गिर रहे हों तो यह पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में किसानों को पेड़ के नीचे मिट्टी बनाकर प्रति पेड़ लगभग दो किलो एनपीके और आधा किलो सुहागा डालने के साथ गोबर की खाद का उपयोग करने की सलाह दी गई है, ताकि पेड़ स्वस्थ रहें और उत्पादन प्रभावित न हो।
.jpg)





.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)




Social Plugin