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29 अप्रैल को गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, मुआवजे के मुद्दे से औद्योगिक गलियारा प्रभावित


HALCHAL INDIA NEWS

गढ़मुक्तेश्वर: गंगा एक्सप्रेसवे के साथ विकसित किए जा रहे औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण की रफ्तार फिलहाल धीमी बनी हुई है। प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन कई किसान कम मुआवजे का हवाला देकर जमीन की रजिस्ट्री कराने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा सर्किल रेट और बाजार भाव में काफी अंतर है, जिससे उन्हें नुकसान हो रहा है।

मेरठ के बिजौली से प्रयागराज तक जाने वाले इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों प्रस्तावित है। इस परियोजना के साथ बनने वाला औद्योगिक गलियारा इलाके के विकास के लिए अहम माना जा रहा है, लेकिन जमीन से जुड़े विवाद इसकी गति को प्रभावित कर रहे हैं।

तहसील क्षेत्र के पांच गांवों की जमीन इस योजना में शामिल है, जहां किसान अब बढ़ती जमीन की कीमतों का हवाला देते हुए अधिग्रहण को लेकर हिचक दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि एक्सप्रेसवे की घोषणा के बाद से जमीन के बाजार मूल्य में तेजी आई है, जबकि सर्किल रेट पुराने स्तर पर ही कायम हैं।

यदि आंकड़ों की बात करें तो दूसरे चरण में जखेड़ा गांव में करीब 93.386 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है, जिसमें से अब तक केवल 18.342 हेक्टेयर जमीन का ही बैनामा हो पाया है। वहीं पहले चरण में भैना, सदरपुर, बहापुर ठेरा और चुचावली गांवों की कुल 118.656 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 47.275 हेक्टेयर पर ही प्रक्रिया पूरी हुई है।

दूसरे चरण में अब तक 51 किसानों ने ही अपनी जमीन दी है, जबकि कई बड़े भू-स्वामी बाजार दर के अनुरूप मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

सरकार द्वारा तय सर्किल रेट लगभग 42 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, जबकि किसानों का दावा है कि बाजार में जमीन की कीमत करीब एक करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है।

एसडीएम श्रीराम यादव के मुताबिक, प्रशासन किसानों से लगातार संवाद कर रहा है और नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जा रहा है। जल्द ही आपसी सहमति बनाकर अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने की कोशिश की जाएगी।