हापुड़।
करीब छह महीने के लंबे अंतराल के बाद नगर पालिका की बोर्ड बैठक शुरू होते ही भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक की शुरुआत में ही सभासद विकास दयाल ने कड़ा विरोध जताते हुए बैठक रुकवा दी। उनका कहना था कि जब तक सभा स्थल पर संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की फोटो नहीं लगाई जाएगी, तब तक बैठक नहीं चलने दी जाएगी।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य महापुरुषों की तस्वीरें सभा स्थल पर लगी हैं तो बाबा साहब की फोटो क्यों नहीं लगाई गई। इस मुद्दे पर काफी देर तक गतिरोध बना रहा और बैठक स्थगित रही। बाद में जब सभा स्थल पर बाबा साहब की फोटो लगाई गई, तब जाकर बैठक की कार्यवाही शुरू हो सकी।
बैठक में कुल 41 सभासद मौजूद रहे, लेकिन शुरुआत से लेकर अंत तक माहौल गरमाया रहा। एक-एक कर सभी सभासदों ने अपनी-अपनी समस्याएं उठाईं और नगर पालिका अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। जहां एक ओर कई प्रस्तावों को पास किया जाना था, वहीं दूसरी ओर सभासदों ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए जमकर हंगामा किया।
विशेष रूप से कूड़ा उठान पर प्रस्तावित 50 रुपये शुल्क को लेकर सभासदों ने तीखा विरोध जताया। सभासद मोनू बजरंग ने इस प्रस्ताव को जनविरोधी बताते हुए साफ कहा कि इसे किसी भी कीमत पर पास नहीं होने दिया जाएगा। उनके समर्थन में अन्य सभासद भी एकजुट नजर आए और एक सुर में शुल्क का विरोध किया।
मोनू बजरंग ने शहर में बढ़ते बंदरों और आवारा कुत्तों के आतंक को भी प्रमुख मुद्दा बताते हुए नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस समस्या से आम जनता बेहद परेशान है, लेकिन नगर पालिका का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो वह धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। मोनू बजरंग ने कहा कि मैने भिखारियों वाली ड्रेस बनवा ली है और अगर हमारी मांग पूरी नहीं होती है तो आने वाली अगली बोर्ड मीटिंग में वो भिखारियों वाली ड्रेस पहनकर भिखारी बन के आयेंगे क्योंकि नगरपालिका ने भिखारी बनने पर मजबूर कर दिया है।
मोनू बजरंग ने कहा, “शहर की जनता आज दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ बंदरों और आवारा कुत्तों का आतंक इतना बढ़ गया है कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं घर से निकलने में डर महसूस कर रहे हैं, दूसरी तरफ नगरपालिका की लापरवाही ने हालात और खराब कर दिए हैं। हम लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। अब जनता से कूड़ा उठाने के नाम पर 50 रुपये वसूली की बात की जा रही है, जो पूरी तरह गलत है। जब मूलभूत सुविधाएं ही सही तरीके से नहीं मिल रहीं, तो अतिरिक्त शुल्क किस आधार पर लिया जाएगा? अगर नगरपालिका ने जल्द इस समस्या का समाधान नहीं किया, तो हम सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। यह केवल एक सभासद का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे शहर की जनता की आवाज है, जिसे दबाया नहीं जा सकता।”
बैठक के दौरान एक सभासद ने तो अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज होकर आत्मदाह तक की चेतावनी दे डाली। उनका आरोप था कि नगर पालिका के पास सफाई के लिए पर्याप्त उपकरण और संसाधन नहीं हैं। साथ ही, जब जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारियों से संपर्क किया जाता है, तो वे फोन तक नहीं उठाते, जिससे जनता में रोष बढ़ रहा है।
सभासदों ने कहा कि अधिकारियों की इस अनदेखी के कारण उन्हें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ता है और कई बार अपमानजनक स्थिति भी झेलनी पड़ती है। लगातार हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप के बीच आखिरकार बैठक में सभी प्रस्ताव पारित कर दिए गए, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती दूरी को उजागर कर दिया।
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