हापुड़।
परिषदीय स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए इस बार अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की तैयारी है। विभाग ने साफ किया है कि सिर्फ रैलियां निकालना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि शिक्षकों को घर-घर जाकर ऐसे बच्चों की पहचान करनी होगी जो स्कूल नहीं जा रहे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग ने विशेष रूप से उन बच्चों पर ध्यान देने के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ दी है या अभी तक स्कूल से नहीं जुड़े हैं। इन बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए अलग से रणनीति बनाई गई है।
‘स्कूल चलो अभियान’ दो चरणों में चलाया जा रहा है। पहला चरण 1 से 15 अप्रैल तक और दूसरा चरण 1 से 15 जुलाई तक निर्धारित है। अभियान के सफल संचालन के लिए जिला, ब्लॉक और स्कूल स्तर पर धनराशि भी जारी की गई है।
इस बजट के जरिए प्रचार-प्रसार के लिए एलईडी वैन, रैलियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अभिभावक बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि लोगों को बच्चों की पढ़ाई के प्रति जागरूक किया जा सके।
इसके साथ ही परिवारों का सर्वे कराने पर भी जोर दिया गया है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि किन घरों के बच्चे स्कूल से दूर हैं। खासकर झुग्गी-झोपड़ी, ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले परिवारों, प्रवासी मजदूरों और दूरदराज इलाकों के बच्चों को प्राथमिकता में रखा गया है।
निर्देशों के अनुसार तीन वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों को बाल वाटिका और छह वर्ष के बच्चों को कक्षा एक में प्रवेश दिलाया जाएगा।
बेसिक शिक्षा अधिकारी रीतु तोमर ने बताया कि अभियान के दौरान शिक्षकों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि हर बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित हो सके।
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