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ऑराकॉन 2026 में गूंजा चिकित्सा नवाचार का स्वर, एम्स दिल्ली समेत देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव


HALCHAL INDIA NEWS

हापुड़। 

सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में आयोजित राष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलन “ऑराकॉन 2026” चिकित्सा शिक्षा, शोध और आधुनिक एनेस्थीसिया तकनीकों का बड़ा मंच बनकर उभरा। एनेस्थीसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विभाग की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों, युवा एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स, शोधकर्ताओं और मेडिकल प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन में वैज्ञानिक व्याख्यान, कैडेवरिक वर्कशॉप, अल्ट्रासाउंड गाइडेड रीजनल एनेस्थीसिया प्रशिक्षण तथा 2D ईको डेमोंस्ट्रेशन आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का आयोजन सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के फाउंडर एवं चेयरमैन डॉ. जे. रामचंद्रन और वाइस चेयरपर्सन राम्या रामचंद्रन के संरक्षण में किया गया। सम्मेलन को डॉ. बरखा गुप्ता, डॉ. मेजर जनरल सी.एस. अहलूवालिया और डॉ. रवि कांत सहगल का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। आयोजन की जिम्मेदारी डॉ. विवेक वैभव और डॉ. शैलजा शर्मा ने संभाली, जबकि डॉ. निखिल वैद और डॉ. मनीष माधरे ने आयोजन सचिव के रूप में वैज्ञानिक गतिविधियों का सफल संचालन किया।


सम्मेलन में एम्स दिल्ली, जीआईएमएस ग्रेटर नोएडा, पारस हॉस्पिटल चंडीगढ़ सहित देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भाग लिया। प्रमुख वक्ताओं में डॉ. अरशद, डॉ. राम सिंह, डॉ. मृतुंजय, डॉ. अमित कुमार, डॉ. समीक्षा खानुजा, डॉ. दीपक पुरी और डॉ. हिमांशु बिष्ट शामिल रहे। विशेषज्ञों ने रीजनल एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर मेडिसिन, पेरिऑपरेटिव केयर, अल्ट्रासाउंड गाइडेड प्रक्रियाओं और इमरजेंसी मेडिसिन से जुड़े नवीनतम विषयों पर विस्तृत जानकारी दी।


सम्मेलन में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें स्नातकोत्तर छात्र, फैकल्टी सदस्य, वरिष्ठ चिकित्सक और शोधकर्ता शामिल रहे। इस दौरान करीब 75 वैज्ञानिक पेपर और पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किए गए। युवा चिकित्सकों और शोधार्थियों ने अपने शोध कार्यों के माध्यम से आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, जटिल मामलों के सफल उपचार और क्लिनिकल अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों की समिति ने शोध पत्रों का मूल्यांकन कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।


ऑराकॉन 2026 की सबसे चर्चित गतिविधियों में हैंड्स-ऑन अल्ट्रासाउंड गाइडेड रीजनल एनेस्थीसिया वर्कशॉप रही। इसमें प्रतिभागियों को विशेषज्ञों की देखरेख में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा पीओकस और 2D ईकोकार्डियोग्राफी पर लाइव डेमोंस्ट्रेशन ने प्रतिभागियों को आधुनिक क्रिटिकल केयर तकनीकों से रूबरू कराया। कैडेवरिक वर्कशॉप सम्मेलन का विशेष आकर्षण रही, जिसमें अपर लिम्ब, लोअर लिम्ब, ट्रंकल और एब्डॉमिनल ब्लॉक्स सहित विभिन्न प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया।


युवा एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स और पोस्टग्रेजुएट छात्रों ने इसे बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. नियति सिन्हा, डॉ. मेघा माहेश्वरी, डॉ. अग्निस्नाता सरकार, डॉ. विभव गुप्ता और डॉ. अभिताशा वी. गोपाल समेत आयोजन समिति, रेजिडेंट्स और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सम्मेलन के समापन पर आयोजकों ने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों और सहयोगी टीमों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।