हापुड़।
आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने पहली बार पोस्ट-हिस्टेरेक्टॉमी वैजाइनल वॉल्ट प्रोलैप्स के इलाज के लिए अत्याधुनिक सैक्रोस्पाइनस लिगामेंट फिक्सेशन (SSLF) सर्जरी सफलतापूर्वक कर नई मिसाल कायम की है। यह जटिल सर्जरी प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. पूजा देवान और उनकी टीम के नेतृत्व में संपन्न हुई।
अस्पताल में 46 वर्षीय महिला राजबाला गंभीर वैजाइनल उभार, चलने-फिरने में परेशानी, असहजता और दैनिक कार्यों में कठिनाई की शिकायत लेकर पहुंची थीं। करीब 15 वर्ष पूर्व उनका हिस्टेरेक्टॉमी ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद धीरे-धीरे पेल्विक फ्लोर की कमजोरी और थर्ड डिग्री वैजाइनल वॉल्ट प्रोलैप्स की समस्या विकसित हो गई। इस बीमारी का असर उनके आत्मविश्वास से लेकर सामान्य जीवनशैली तक पर पड़ रहा था।
विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विस्तृत परीक्षण, पेल्विक मूल्यांकन और आवश्यक जांचों के बाद मरीज को पेल्विक रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के लिए तैयार किया गया। संयुक्त स्पाइनल और एपिड्यूरल एनेस्थीसिया के तहत हुई इस सर्जरी में सर्जिकल टीम ने पेल्विस में स्थित मजबूत फाइब्रस संरचना सैक्रोस्पाइनस लिगामेंट की पहचान कर वैजाइनल वॉल्ट को उससे जोड़ा, जिससे पेल्विक सपोर्ट को दोबारा सामान्य स्थिति में लाया जा सका।
सर्जरी के दौरान मरीज में सिस्टोसील और रेक्टोसील जैसी अतिरिक्त समस्याएं भी सामने आईं। डॉक्टरों ने एंटीरियर कोल्पोरैफी और पोस्टीरियर कोल्पोपेरिनियोरैफी तकनीक के जरिए इन जटिलताओं का भी सफल उपचार किया। पूरी प्रक्रिया बिना किसी जटिलता के संपन्न हुई और मरीज को सफल पोस्ट-ऑपरेटिव निगरानी के बाद स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया।
दो सप्ताह बाद फॉलोअप जांच में मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार पाया गया। चिकित्सकीय परीक्षण में वैजाइनल वॉल्ट सामान्य स्थिति में मिला और मरीज ने दर्द व असुविधा से राहत मिलने के साथ जीवन की गुणवत्ता में बड़े सुधार की बात कही।
स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. परिधि गर्ग ने बताया कि सैक्रोस्पाइनस लिगामेंट फिक्सेशन पोस्ट-हिस्टेरेक्टॉमी वैजाइनल वॉल्ट प्रोलैप्स के उपचार की सबसे प्रभावी सर्जरी में शामिल है। खासतौर पर रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं और पहले हिस्टेरेक्टॉमी करा चुकी मरीजों के लिए यह तकनीक बेहद लाभकारी साबित होती है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में बड़े पेट के ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे मरीज को कम दर्द, कम जटिलताएं और तेजी से रिकवरी मिलती है।
संस्थान प्रबंधन ने इस उपलब्धि को महिला स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बड़ी सफलता बताते हुए पूरी मेडिकल टीम को बधाई दी। डॉ. जे. रामचंद्रन ने कहा कि इस तरह की उन्नत सर्जिकल विशेषज्ञता संस्थान को स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। वहीं वाइस चेयरपर्सन रम्या रामचंद्रन ने इसे आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
संस्थान के वरिष्ठ प्रबंधन से जुड़े डॉ. बरखा गुप्ता, ब्रिगेडियर डॉ. आर.के. सहगल, एन. वर्धराजन, रघुवर दत्त और डॉ. मेजर जनरल चरणजीत सिंह अहलूवालिया ने भी स्त्री रोग विभाग की टीम की सराहना करते हुए कहा कि अब क्षेत्र की महिलाओं को उन्नत इलाज के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।







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