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चार साल बाद भी शुरू नहीं हो सके कूड़ा निस्तारण केंद्र, लाखों की योजना बनी शोपीस


HALCHAL INDIA NEWS

बहादुरगढ़। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाए गए कूड़ा निस्तारण केंद्र वर्षों बाद भी शुरू नहीं हो सके हैं। गढ़मुक्तेश्वर ब्लॉक क्षेत्र के करीब 40 गांवों में लाखों रुपये की लागत से तैयार किए गए ये केंद्र आज भी बंद पड़े हैं, जिससे योजना के उद्देश्य पूरे नहीं हो पा रहे हैं।

                                          

जानकारी के अनुसार प्रत्येक अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र के निर्माण पर करीब पांच से सात लाख रुपये खर्च किए गए थे। इन केंद्रों के माध्यम से गांवों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाना था। साथ ही स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की भी योजना थी।

हालांकि निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद अधिकांश केंद्रों पर अब तक संचालन शुरू नहीं हो पाया है। नतीजतन लाखों रुपये की लागत से तैयार भवन और संसाधन उपयोग के अभाव में बेकार पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन केंद्रों को चालू किया जाता तो गांवों में साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर होती और रोजगार के अवसर भी बढ़ते।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता और प्रभावी निगरानी के अभाव में यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर उतरने से पहले ही दम तोड़ती नजर आ रही है। वर्षों में कई अधिकारी बदले, लेकिन केंद्रों के संचालन को लेकर कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी।

खंड विकास अधिकारी विजय यादव ने बताया कि अपशिष्ट प्रबंधन केंद्रों को शुरू कराने के लिए पूर्व में भी प्रयास किए गए थे, लेकिन पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध न होने के कारण संचालन शुरू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि संबंधित टीम के साथ बैठक कर जल्द ही केंद्रों को चालू कराने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि योजना का लाभ ग्रामीणों तक पहुंच सके।