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कर अधिवक्ताओं के उत्पीड़न का आरोप, टैक्स बार एसोसिएशन ने पुलिस पर उठाए गंभीर सवाल


HALCHAL INDIA NEWS

हापुड़। 

कर क्षेत्र में कार्यरत अधिवक्ताओं के कथित उत्पीड़न को लेकर टैक्स बार एसोसिएशन हापुड़ (पंजीकृत) ने पुलिस विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एसोसिएशन की ओर से पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर कहा गया है कि जीएसटी और आयकर से जुड़े मामलों में व्यापारियों पर दर्ज एफआईआर के बहाने पुलिस अधिवक्ताओं को बिना किसी दोष, नोटिस या विधिक प्रक्रिया के जबरन उनके चैंबर से उठाकर थाने ले जा रही है, जो कानून और अधिवक्ता की गरिमा दोनों के खिलाफ है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पुलिस व्यापारी के कथित धोखाधड़ी या करापंचन के मामलों में असली दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उनके अधिवक्ताओं को निशाना बना रही है। भारी पुलिस बल के साथ अधिवक्ताओं के चैंबर पर पहुंचकर उन्हें बलपूर्वक थाने ले जाना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि अधिवक्ता अधिनियम 1961 और न्यायिक सिद्धांतों का खुला उल्लंघन भी है। 

टैक्स बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि कर अधिवक्ताओं की भूमिका केवल व्यापारी की फर्म का पंजीकरण कराने, जीएसटी व आयकर रिटर्न दाखिल करने और कानून के अनुसार परामर्श देने तक सीमित होती है। जीएसटी पोर्टल पर रिटर्न व्यापारी द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों और सरकारी आईटीसी के आधार पर दाखिल किए जाते हैं। कर की गणना कर उसे सरकारी खाते में जमा कराना एक तकनीकी और वैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें अधिवक्ता का व्यापार, खरीद-बिक्री या किसी भी अवैध गतिविधि से कोई सीधा संबंध नहीं होता। 

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि जीएसटी पंजीकरण के दौरान व्यापारी की पहचान, आधार-पैन सत्यापन और व्यापार स्थल का भौतिक सत्यापन अधिवक्ता नहीं, बल्कि विभागीय अधिकारी स्वयं करते हैं। इसके बावजूद अधिवक्ताओं को दोषी ठहराकर पूछताछ के नाम पर थाने ले जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंता का विषय है।

ज्ञापन में पुलिस पर अधिवक्ता और मुवक्किल के बीच संवाद की गोपनीयता भंग करने और स्वतंत्र रूप से पैरवी करने के अधिकार में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया गया है। टैक्स बार एसोसिएशन ने कहा कि बिना प्राथमिक जांच, समन या नोटिस के अधिवक्ता को उठाना पूरी तरह अवैध है और इससे न केवल अधिवक्ताओं की निष्पक्ष कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है, बल्कि पूरे न्यायिक तंत्र की छवि भी धूमिल हो रही है।


एसोसिएशन ने पुलिस से मांग की है कि अधिवक्ताओं को भयभीत करने की कार्रवाई तुरंत रोकी जाए। यदि किसी अधिवक्ता से जानकारी आवश्यक हो तो बार एसोसिएशन को विश्वास में लेकर विधि अनुसार नोटिस या समन जारी किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि अधिवक्ताओं के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन जारी रहा तो टैक्स बार एसोसिएशन को विधिक कार्रवाई करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। 

टैक्स बार एसोसिएशन ने पुलिस अधीक्षक से अपील की है कि अधिवक्ता पेशे की गरिमा का सम्मान करते हुए अधीनस्थ अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए जाएं, ताकि अधिवक्ताओं के सम्मान और न्याय की रक्षा सुनिश्चित हो सके।