HALCHAL INDIA NEWS
हापुड़।
मेरठ से प्रयागराज तक तैयार किए जा रहे गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर ट्रायल की चर्चाएं तेज हैं, वहीं निर्माण एजेंसी द्वारा लगभग पूरा काम हो जाने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि वास्तविक स्थिति पर नजर डालें तो एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में जरूरी कार्य अब भी पूरे नहीं हुए हैं, जिससे ट्रायल की प्रक्रिया टल सकती है।
करीब 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। बीते कुछ समय से इसके ट्रायल की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अभी रेलिंग, सर्विस रोड और कुछ स्थानों पर मुख्य मार्ग से जुड़े कार्य अधूरे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अधूरी तैयारियों के साथ ट्रायल कराना दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
पहले चरण में हापुड़ से बदायूं के बीच ट्रायल प्रस्तावित है। प्रशासन का कहना है कि इंटरचेंज, टोल प्लाजा, स्ट्रीट लाइट और डिवाइडर जैसे मुख्य कार्य पूरे हो चुके हैं, लेकिन सहायक सड़कों की स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
मेरठ से जुड़े हिस्से में ज्यादातर काम पूरा हो चुका है, मगर सिंभावली और गढ़ क्षेत्र में सर्विस रोड का निर्माण अभी बाकी है। कुछ स्थानों पर सर्विस रोड का कार्य शुरू नहीं हो पाया है, जबकि कुछ जगह मुख्य कैरिजवे का हिस्सा भी अधूरा है। कई स्थानों पर सुरक्षा रेलिंग न होने से जोखिम बढ़ रहा है, फिलहाल केवल खंभे लगाए जा रहे हैं।
सेवानिवृत्त अभियंता एस.के. सक्सेना के अनुसार यदि सर्विस रोड पूरी तरह चालू नहीं हुई तो वाहन चालक गलत रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे रॉन्ग साइड ड्राइविंग, अचानक यू-टर्न और अव्यवस्था की स्थिति पैदा होगी, जो हादसों को बढ़ावा दे सकती है। उन्होंने बताया कि ट्रायल से पहले सड़क की सतह, संकेतक, डिवाइडर और सुरक्षा मानकों की जांच बेहद जरूरी होती है।
चूंकि एक्सप्रेसवे पर तेज गति से वाहन चलने की संभावना रहती है, इसलिए अधूरे निर्माण के बीच ट्रायल को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। फिलहाल यूपीडा की ओर से भी किसी प्रकार की जल्दबाजी के संकेत नहीं मिल रहे हैं।
.jpg)





.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)

.jpeg)



Social Plugin