Ticker

6/recent/ticker-posts

Header logo

अमेरिका-भारत व्यापार समझौता रद्द करने की मांग तेज, भाकियू ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन


HALCHAL INDIA NEWS

हापुड़। 

अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के विरोध में किसान संगठनों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम संबोधित ज्ञापन कलेक्ट्रेट में सौंपकर उक्त समझौते को तत्काल रद्द करने की मांग की। ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया गया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


ज्ञापन में कहा गया है कि 12 फरवरी 2026 को देशभर के किसान संगठन धरना-प्रदर्शन कर इस समझौते का विरोध जता रहे हैं। भाकियू का आरोप है कि यह व्यापार समझौता किसान विरोधी है और इससे देश की कृषि व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। संगठन का कहना है कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है, लेकिन इतने महत्वपूर्ण निर्णय में किसानों की सहमति और सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया है।


किसानों ने आशंका जताई कि यदि आयात शुल्क में ढील दी गई तो अमेरिका से भारी सब्सिडी पर उत्पादित सस्ती कृषि उपज भारतीय बाजारों में आएगी, जिससे सोयाबीन, मक्का, गेहूं, दालें और डेयरी उत्पादों के दाम प्रभावित होंगे। पहले से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की लड़ाई लड़ रहे भारतीय किसानों के लिए ऐसी प्रतिस्पर्धा में टिक पाना मुश्किल होगा।
ज्ञापन में डेयरी क्षेत्र को लेकर भी चिंता जताई गई है। कहा गया कि भारत की डेयरी व्यवस्था छोटे और सीमांत किसानों तथा सहकारी समितियों पर आधारित है। यदि अमेरिकी डेयरी उत्पादों को खुली छूट मिलती है तो लाखों दुग्ध उत्पादक परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा।


किसान नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि व्यापार संतुलन के नाम पर कृषि सब्सिडी कम करने और सार्वजनिक खरीद प्रणाली को कमजोर करने का दबाव बनाया जा सकता है। इससे एमएसपी व्यवस्था, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और देश की खाद्य आत्मनिर्भरता पर खतरा उत्पन्न होगा। बीज और बौद्धिक संपदा अधिकार के मुद्दे पर भी संगठन ने चिंता व्यक्त की। ज्ञापन में कहा गया कि अमेरिकी कंपनियां पेटेंट आधारित बीज प्रणाली को बढ़ावा देती हैं, जबकि भारत में किसान परंपरागत बीज संरक्षण पद्धति पर निर्भर हैं। यदि बीजों पर कॉर्पोरेट नियंत्रण बढ़ा तो किसानों की स्वायत्तता प्रभावित होगी।


भाकियू पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यह मामला केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार और राष्ट्रीय आर्थिक स्वायत्तता से जुड़ा प्रश्न है। संगठन ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग की है।