हापुड़।
गढ़मुक्तेश्वर तहसील के ग्राम कल्याणपुर स्थित प्राचीन कल्याणेश्वर महादेव मंदिर को लेकर जूना अखाड़े में चल रहे विवाद के बीच महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कल्याणेश्वर महादेव मंदिर जूना अखाड़े के संन्यासियों का स्थान है और संत परंपरा के अनुसार वहां केवल जूना अखाड़े के सन्यासी ही महंत हो सकते हैं।
शिवशक्ति धाम डासना निवासी महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने श्रीमहंत स्वामी हरिगिरि जी महाराज के शिष्य होने का उल्लेख करते हुए जारी बयान में कहा कि अपने आपको श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े का अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं तेरह मढ़ी के अध्यक्ष श्रीमहंत स्वामी नारायण गिरी का शिष्य बताने वाला सूर्यानंद नाग कल्याणेश्वर महादेव मंदिर का महंत नहीं है और न ही मंदिर की किसी व्यवस्था से उसका कोई संबंध है।
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति स्वयं को जूना अखाड़े के किसी स्थान का महंत घोषित नहीं कर सकता। इसके लिए अखाड़े की निर्धारित परंपरा और प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत ही किसी को महंत घोषित किया जाता है। बयान में यह भी कहा गया कि श्रीमहंत स्वामी नारायण गिरी जी महाराज के आदेशानुसार सूर्यानंद का कल्याणेश्वर महादेव मंदिर, ग्राम कल्याणपुर, तहसील गढ़मुक्तेश्वर जिला हापुड़ से कोई संबंध नहीं है।
महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा कि भविष्य में इस प्राचीन और पवित्र मंदिर का महंत कौन होगा, इसका निर्णय श्रीमहंत स्वामी नारायण गिरी जी महाराज द्वारा श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के परामर्श से किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सूर्यानंद की किसी भी गतिविधि या कृत्य से श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े का कोई संबंध नहीं है और उसके किसी भी कार्य के लिए अखाड़ा उत्तरदायी नहीं होगा।
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