हापुड़।
कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से जिला अस्पताल और पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट फिलहाल उपयोग में नहीं आ रहे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई ये व्यवस्थाएं लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी हैं, जबकि अस्पतालों में ऑक्सीजन की जरूरत मुख्य रूप से सिलिंडरों के जरिए पूरी की जा रही है।
महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कमी ने गंभीर संकट पैदा किया था। इसी अनुभव को देखते हुए विभिन्न सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट स्थापित किए गए थे, ताकि भविष्य में किसी आपात स्थिति से निपटा जा सके। लेकिन वर्तमान में अधिकांश प्लांट बंद पड़े हैं और नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहे हैं।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार कई प्लांटों के संचालन के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की कमी है। समय-समय पर मॉक ड्रिल या निरीक्षण के दौरान इन्हें चालू कर परीक्षण किया जाता है, लेकिन सामान्य दिनों में इनका उपयोग नहीं हो रहा है। कुछ स्थानों पर मशीनें लंबे समय से बंद होने के कारण रखरखाव की भी जरूरत महसूस की जा रही है।
अस्पतालों में भर्ती मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर ऑक्सीजन सिलिंडरों के माध्यम से आपूर्ति की जा रही है। वहीं गंभीर स्थिति वाले कई मरीजों को बेहतर सुविधाओं वाले अस्पतालों में रेफर किए जाने की बात भी सामने आती रही है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ऑक्सीजन प्लांटों की समय-समय पर जांच की जाती है और उन्हें जरूरत पड़ने पर उपयोग के लिए तैयार रखा जाता है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि मरीजों को ऑक्सीजन की उपलब्धता में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
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