HALCHAL INDIA NEWS
हापुड़।
जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुए दर्दनाक हादसे में शहीद हुए भारतीय सेना के जवान रिंखिल बालियान को शनिवार को उनके पैतृक गांव भटैल में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। तिरंगे में लिपटे शहीद के अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। माहौल उस वक्त और भी गमगीन हो गया जब शहीद के एक वर्षीय पुत्र ने पिता को मुखाग्नि दी। इस दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।
अंतिम संस्कार के दौरान प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सेना के अधिकारी, पुलिस बल और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। राजकीय सम्मान के साथ शहीद को अंतिम सलामी दी गई। जैसे ही मुखाग्नि की रस्म अदा की गई, श्मशान घाट पर सन्नाटा छा गया और कई लोग अपने आंसू नहीं रोक सके। इस भावुक क्षण में जिलाधिकारी अभिषेक पांडे भी खुद को संभाल नहीं पाए और उनकी आंखें भर आईं।
शहीद रिंखिल बालियान का परिवार शुरू से ही देशसेवा से जुड़ा रहा है। उनके पिता भी सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं और उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रिंखिल बालियान ने भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा की। करीब पांच वर्ष पहले उनका विवाह हुआ था। उनके परिवार में तीन साल की बेटी वास्तिका और एक साल का बेटा राघव है, जिसने आज अपने पिता को अंतिम विदाई दी।
गौरतलब है कि 22 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के डोडा क्षेत्र में एक सैन्य वाहन ऑपरेशन के दौरान खराब मौसम और दुर्गम रास्ते के चलते अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गया था। यह वाहन करीब 200 फीट गहरी खाई में जा गिरा, जिसमें 10 जवान शहीद हो गए थे। इन्हीं वीर सपूतों में हापुड़ के रिंखिल बालियान भी शामिल थे।
शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान “भारत माता की जय” और “शहीद अमर रहें” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। हर आंख नम थी, लेकिन दिलों में गर्व भी था कि इस मिट्टी ने देश को एक और वीर सपूत दिया। शहीद रिंखिल बालियान का बलिदान हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा के लिए प्रेरित करता।
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