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हापुड़।
चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी का पर्व इस वर्ष 27 मार्च, शुक्रवार को सर्वार्थसिद्धि योग में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार वह सभी दिव्य संयोग बन रहे हैं, जिनमें त्रेतायुग में भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था।
भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा के अध्यक्ष ज्योतिर्विद पं. के.सी. पाण्डेय ‘काशी वाले’ ने बताया कि कर्क लग्न, मध्यान्ह काल और अभिजीत मुहूर्त का विशेष संयोग इस दिन बन रहा है, जो श्रीराम जन्मोत्सव पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
उन्होंने बताया कि नवमी तिथि 26 मार्च को रात्रि 11:49 बजे से प्रारंभ होकर 27 मार्च को प्रातः 10:07 बजे तक रहेगी, जबकि पुनर्वसु नक्षत्र 26 मार्च को अपराह्न 4:19 बजे से प्रारंभ होकर 27 मार्च को अपराह्न 3:24 बजे तक रहेगा। धर्मग्रंथों के अनुसार अष्टमी तिथि से संयुक्त नवमी में व्रत नहीं करना चाहिए, इसलिए 26 मार्च को रामनवमी व्रत मान्य नहीं है।
चूंकि 27 मार्च को ही मध्यान्ह काल, पुनर्वसु नक्षत्र, कर्क लग्न और अभिजीत मुहूर्त का संयोग प्राप्त हो रहा है, अतः इसी दिन रामनवमी व्रत एवं पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा। ज्योतिर्विदों के अनुसार 27 मार्च को प्रातः 9:21 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक मध्यान्ह काल रहेगा, जबकि 11:59 बजे से 12:45 बजे तक अभिजीत मुहूर्त होगा। यह समय भगवान श्रीराम के जन्म पूजन के लिए विशेष फलदायक माना गया है। श्रद्धालु इस अवधि में विधि-विधान से श्रीराम का पूजन, पाठ और आराधना करेंगे।
इसी दिन नवरात्रि की नवमी तिथि होने के कारण मां दुर्गा के नवम स्वरूप की पूजा, हवन और कन्या पूजन भी किया जाएगा। हवन में “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र तथा “नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः” आदि मंत्रों से आहुतियां दी जाएंगी। श्रद्धालु मां को दूध का भोग लगाकर कन्याओं को भोजन, प्रसाद और उपहार प्रदान करेंगे।
नवरात्रि व्रत का पारण दशमी तिथि में किया जाता है, इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालु 28 मार्च, शनिवार को सूर्योदय के बाद व्रत खोलेंगे। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजन करने से भगवान श्रीराम और मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।







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