HALCHAL INDIA NEWS
हापुड़।
जिले में बड़ी संख्या में लोगों की आभा आईडी तैयार हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं में इसका उपयोग अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। सरकारी अस्पतालों में डिजिटल व्यवस्था और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों की हेल्थ हिस्ट्री ऑनलाइन दर्ज नहीं हो पा रही है और ओपीडी में अभी भी कागजी पर्चों पर ही उपचार दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2022 से लोगों की स्वास्थ्य कुंडली डिजिटल करने के उद्देश्य से आभा आईडी बनवाने का अभियान शुरू किया था। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 7.50 लाख लोगों की आभा आईडी बन चुकी है, जो जिले की आबादी का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा है। इसके बावजूद अधिकांश लोगों को इस सुविधा का फायदा नहीं मिल पा रहा है।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों का पंजीकरण रजिस्टर में किया जाता है और डॉक्टर एक रुपये के पर्चे पर दवाएं लिखते हैं। फार्मेसी में भी पर्चा देखकर ही दवाएं दी जाती हैं, क्योंकि ओपीडी और दवा वितरण व्यवस्था डिजिटल रूप से आपस में जुड़ी नहीं है। निजी अस्पतालों में भी डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की व्यवस्था सीमित है।
आभा आईडी का मुख्य उद्देश्य मरीजों की बीमारी, इलाज और दवाओं का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध कराना है, ताकि किसी भी अस्पताल में डॉक्टर आसानी से मरीज की स्वास्थ्य जानकारी देख सकें। लेकिन नेटवर्क, कंप्यूटर और अन्य तकनीकी संसाधनों के अभाव में योजना पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील त्यागी ने बताया कि आभा आईडी पर उपचार समरी अपलोड करने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और आवश्यक उपकरणों के लिए शासन से मांग की गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी अस्पतालों में डिजिटल हेल्थ सिस्टम लागू करने का प्रयास किया जा रहा है।
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