हापुड़।
केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) से संबंधित प्रावधानों में किए गए बदलाव के विरोध में पेंशनर्स संगठनों ने अपनी आवाज बुलंद कर दी है। ऑल इंडिया स्टेट पेंशनर्स फेडरेशन, नई दिल्ली के आह्वान पर बुधवार को पेंशनर्स ने विरोध दर्ज कराते हुए प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा और वित्त विधेयक-2025 के प्रावधानों को वापस लेने या उसमें संशोधन की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि वित्त विधेयक-2025 के माध्यम से केंद्र सरकार को पेंशनर्स का वर्गीकरण करने और उनके बीच अंतर बनाए रखने का अधिकार दे दिया गया है, जिसे बिना पूर्व सूचना के विधेयक का हिस्सा बनाकर पारित किया गया। पेंशनर्स का आरोप है कि इस व्यवस्था के लागू होने से सेवानिवृत्ति की तिथि को पेंशन पात्रता का आधार बनाया जाएगा, जिससे पुराने पेंशनर्स को नए वेतन आयोगों की सिफारिशों के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है।
पेंशनर्स संगठनों ने कहा कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में यह स्थिति बुजुर्गों के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर सकती है। उनका कहना है कि वर्षों तक सरकारी सेवा देने वाले कर्मचारियों को वृद्धावस्था में सम्मानजनक जीवन मिलना चाहिए, लेकिन प्रस्तावित प्रावधानों से उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है।
ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले डी.एस. नकारा बनाम भारत संघ (1983) का हवाला देते हुए कहा गया कि पेंशन कोई दया नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा का अधिकार है, जिसका उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन प्रदान करना है। पेंशनर्स ने तर्क दिया कि महंगाई और मुद्रा की गिरती क्रय शक्ति का प्रभाव सभी पर समान रूप से पड़ता है, इसलिए सेवानिवृत्ति की तिथि के आधार पर लाभ में भेदभाव उचित नहीं है।
संगठन का कहना है कि 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इस प्रावधान से अपूरणीय क्षति हो सकती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सातवें वेतन आयोग ने पुराने और नए पेंशनर्स के बीच समानता की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र सरकार ने पहले स्वीकार भी किया था। इन्हीं मुद्दों को लेकर फेडरेशन ने 25 मार्च 2026 को “विरोध दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय लिया और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाया।
पेंशनर्स ने मांग की कि सरकार अपने “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के संकल्प के अनुरूप वित्त विधेयक-2025 में आवश्यक संशोधन करे, ताकि किसी भी वर्ग के पेंशनर्स के साथ भेदभाव न हो। संगठन ने आशा जताई कि सरकार उनकी समस्याओं पर संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी और शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी, जिससे देशभर के लाखों पेंशनर्स को राहत मिल सके।







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