HALCHAL INDIA NEWS
गढ़मुक्तेश्वर। बीते तीन महीनों में गढ़ सर्किल क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में लगातार इजाफा देखने को मिला है। इस अवधि में करीब 40 हादसे सामने आए, जिनमें 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
इन घटनाओं ने क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की सीमाओं को भी उजागर किया है। गढ़ और सिंभावली के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में गंभीर घायलों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बड़े अस्पतालों के लिए भेजना पड़ रहा है। इससे इलाज में देरी हो रही है, जो कई मामलों में जानलेवा साबित होती है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गढ़ कोतवाली क्षेत्र में सबसे ज्यादा 12 मौतें दर्ज की गईं। इसके अलावा सिंभावली क्षेत्र में 6 और बहादुरगढ़ इलाके में 3 लोगों की जान हादसों में गई। अधिकांश दुर्घटनाएं नेशनल हाईवे-09 पर हुईं, जहां तेज रफ्तार और भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जोखिम बढ़ा रही है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर दुर्घटना के तुरंत बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल जाए, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों में संसाधनों की कमी और विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
दूसरी ओर, यातायात नियमों की अनदेखी भी हादसों की बड़ी वजह बन रही है। तेज गति, गलत दिशा में वाहन चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल न करना जैसी लापरवाहियां आम हैं। कई मामलों में नशे में वाहन चलाने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
‘गोल्डन ऑवर’ में देरी बनी चुनौती
दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा, जिसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है, जीवन बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। लेकिन गढ़ क्षेत्र में यह समय अक्सर रेफर प्रक्रिया और इंतजार में निकल जाता है, जिससे हालात और बिगड़ जाते हैं।क्षेत्राधिकारी स्तुति सिंह के अनुसार, पिछले तीन महीनों में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले 100 से ज्यादा वाहन चालकों के खिलाफ चालान किए गए हैं। आगे भी नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए अभियान जारी रहेगा।






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