Ticker

6/recent/ticker-posts

Header logo

बड़े हादसों के बाद जागता सिस्टम, फिर ठंडे बस्ते में चली जाती हैं योजनाएं

HALCHAL INDIA NEWS

हापुड़ जिले में सड़क हादसे लगातार लोगों की जान ले रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र में हाल ही में तेज रफ्तार कार सड़क किनारे पड़े ईंटों के ढेर से टकरा गई, जिसमें तीन युवकों की मौत हो गई। जांच में हादसे का कारण ओवरस्पीड बताया गया, लेकिन स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उस ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

ग्रामीणों के मुताबिक जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां पिछले दो वर्षों में करीब 18 छोटे-बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद न तो स्पीड ब्रेकर बनाए गए और न ही पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की गई। रात के समय अंधेरा रहने से दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है।

जिले के अन्य प्रमुख मार्गों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर अब तक स्पीड कैमरे नहीं लगाए गए हैं। बुलंदशहर हाईवे पर रांग साइड ड्राइविंग रोकने के लिए कट बंद नहीं किए गए, जबकि मेरठ हाईवे पर वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आती।

हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दो महीनों में जिले में लगभग हर दिन किसी न किसी व्यक्ति की सड़क हादसे में मौत हुई है। इसके बावजूद रोड सेफ्टी बैठकों में लिए गए फैसले जमीन पर उतरते नहीं दिख रहे हैं। कार्रवाई के दावे केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित रह जाते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक ब्लैक स्पॉट पर स्थायी समाधान, स्ट्रीट लाइट, स्पीड कंट्रोल सिस्टम और सख्त ट्रैफिक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हादसों का सिलसिला नहीं रुकेगा।

वहीं जिला प्रभारी आई-रेड निशांत राजपूत ने बताया कि डेहरा गांव में हुए हादसे की जांच में ओवरस्पीड कारण सामने आया है। रोड सेफ्टी बैठकों में लिए गए निर्णयों के पालन के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं और डीएम स्तर से लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की जिंदगी महत्वपूर्ण है और प्रत्येक हादसे का ऑडिट कराया जा रहा है।