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घर-घर बन रहे मूढ़े, कारीगरी से बदल रही महिलाओं की जिंदगी


HALCHAL INDIA NEWS

गढ़मुक्तेश्वर में पारंपरिक हस्तशिल्प का काम नई पहचान बना रहा है। यहां मूढ़ा बनाने की कारीगरी हजारों महिलाओं के लिए रोज़गार का जरिया बन चुकी है। महिलाएं घर बैठे ही इस काम से जुड़कर न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत कर रही हैं।

नगर के सुंदर नगर, सुभाष चौक, सेगेवाला और मीरा रेती जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में घरों में यह काम होता दिखाई देता है। महिलाएं अपने घरेलू कामों के साथ-साथ समय निकालकर मूढ़े तैयार करती हैं, जिन्हें व्यापारी खरीदकर देश के अलग-अलग शहरों और विदेशों तक पहुंचाते हैं।

इन मूढ़ों की खासियत उनकी मजबूती, आकर्षक डिजाइन और किफायती दाम हैं, जिसके चलते बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि यह काम अब एक छोटे उद्योग का रूप ले चुका है और इससे जुड़े लोग अच्छी आमदनी भी कर रहे हैं।

महिलाओं का कहना है कि पहले वे आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर थीं, लेकिन अब अपनी कमाई से घर के खर्च और बच्चों की पढ़ाई में योगदान दे रही हैं।

कारीगरों का मानना है कि यदि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और बाजार की सुविधाएं मिलें, तो यह उद्योग और तेजी से आगे बढ़ सकता है। इसके बावजूद सीमित संसाधनों में भी यहां की महिलाएं अपने हुनर से सफलता की मिसाल पेश कर रही हैं।

इसके अलावा, मूढ़ों और अन्य उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री भी की जा रही है, जिससे इनकी पहुंच और ज्यादा बढ़ रही है।