हापुड़।
स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम के जल्द शहर में आने की संभावना है, लेकिन नगर पालिका स्तर पर तैयारियां अब भी अधूरी नजर आ रही हैं। पिछले कई वर्षों से लगातार गिरती रैंकिंग के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी सतर्क नहीं दिख रहे हैं।
शहर की सड़कों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं और नाले गंदगी से भरे पड़े हैं, जबकि सफाई व्यवस्था पर हर साल 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद कूड़ा निस्तारण के लिए अब तक कोई ठोस व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी है।
स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार भी 12,500 अंकों के आधार पर मूल्यांकन होगा, जिसमें डोर-टू-डोर कलेक्शन, नियमित सफाई, कचरा निस्तारण, परिवहन, प्रसंस्करण, खुले में शौच मुक्त स्थिति, रात्रि सफाई और सामुदायिक शौचालयों की स्थिति जैसे बिंदु शामिल हैं।
सर्वेक्षण टीम घरों और बाजारों में जाकर लोगों से फीडबैक लेती है। हालांकि, आमतौर पर जनता की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने से कुछ अंक मिल जाते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और कचरा निस्तारण की कमजोर व्यवस्था के कारण कुल रैंकिंग प्रभावित होती है।
पिछले वर्ष हापुड़ नगर पालिका की रैंकिंग देश में 393वें स्थान पर रही, जो उससे पहले के वर्ष से भी खराब थी। इसके बावजूद सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा सके हैं।
जिले की अन्य नगर पालिकाओं में भी कूड़ा निस्तारण की स्थिति संतोषजनक नहीं है। पिलखुवा का कचरा मुकीमपुर स्थित प्लांट में भेजा जाता है, लेकिन उसके भी बार-बार बंद रहने की शिकायतें मिलती रही हैं। हापुड़ में अभी तक कचरा निस्तारण प्लांट के लिए जमीन खरीद की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई है।
अमित निम्बेकर के अनुसार, सर्वेक्षण टीम के जल्द आने की उम्मीद है और संबंधित अधिकारियों को तैयारी पूरी रखने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि टीम स्वयं निरीक्षण कर मूल्यांकन करती है, जबकि पालिका स्तर से आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं।
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