Ticker

6/recent/ticker-posts

Header logo

टीईटी से पहले नियुक्त शिक्षकों के हक की लड़ाई तेज, प्रधानमंत्री से मांगा स्थायी संरक्षण


HALCHAL INDIA NEWS

हापुड़। 

अखिल राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर देशभर में उत्पन्न असमंजस और शिक्षकों की चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी हापुड़ के माध्यम से एक ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में वर्ष 2010 से पूर्व देश के विभिन्न राज्यों में नियुक्त शिक्षकों तथा उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने से पहले 27 जुलाई 2011 तक नियुक्त शिक्षकों को विधायी और नीतिगत संरक्षण प्रदान करने की मांग की गई है।

                          
      

महासंघ ने कहा कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा टीईटी को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया गया था। इससे पहले विभिन्न राज्यों में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों, योग्यता मानदंडों और चयन प्रक्रियाओं के तहत विधिवत रूप से की गई थीं। ऐसे शिक्षकों ने वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


ज्ञापन में कहा गया है कि आरटीई एक्ट की धारा 23(2) में वर्ष 2017 में किए गए संशोधन तथा इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णयों के बाद पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों को लेकर आशंकाएं उत्पन्न हो गई हैं। संगठन का तर्क है कि किसी भी नई पात्रता अथवा योग्यता को पूर्व प्रभाव से लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।


महासंघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। साथ ही उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सभी वैधानिक लाभों को पूर्ण संरक्षण दिया जाए। संगठन ने आवश्यकता पड़ने पर संसद में विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाकर इस वर्ग को स्थायी राहत देने की भी मांग की है।


ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि शिक्षकों के बीच व्याप्त असुरक्षा और भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। महासंघ ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षक वर्ग के हितों की रक्षा के लिए संवेदनशील और न्यायपूर्ण निर्णय लेगी।