HALCHAL INDIA NEWS
गढ़मुक्तेश्वर। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को घर के पास प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित जन आरोग्य केंद्र और स्वास्थ्य उपकेंद्र कई स्थानों पर बदहाली का शिकार हैं। हालात ऐसे हैं कि इन केंद्रों से अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों को मजबूरन निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है।
शनिवार को अल्लाबख्शपुर, भैना और बंगौली गांव स्थित स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति का जायजा लिया गया। तीनों केंद्रों पर व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं मिलीं। कई जगह परिसर में झाड़ियां उगी हुई थीं, जबकि साफ-सफाई का भी अभाव दिखाई दिया।
अल्लाबख्शपुर में केंद्र पड़ा सूना
अल्लाबख्शपुर स्थित जन आरोग्य केंद्र पर निरीक्षण के दौरान कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं मिला। केंद्र परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ था और उपचार के लिए कोई मरीज भी नहीं पहुंचा था। भवन के अंदर गंदगी और जलभराव की स्थिति दिखाई दी, जिससे केंद्र लंबे समय से उपेक्षित प्रतीत हुआ।
बंगौली में अक्सर रहता है ताला
सिंभावली क्षेत्र के बंगौली गांव स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र में भी व्यवस्थाएं कमजोर मिलीं। ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र अधिकांश समय बंद रहता है, जिससे उन्हें छोटी-बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ता है।
भैना में भी नहीं मिल रही सुविधाएं
बहादुरगढ़ क्षेत्र के भैना गांव में बने उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। लाखों रुपये की लागत से बने भवन में न तो कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद था और न ही मरीज दिखाई दिए। परिसर में गंदगी और अव्यवस्था का माहौल देखने को मिला।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित केंद्रों की स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार जर्जर भवनों की मरम्मत और आवश्यक स्टाफ की तैनाती की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, ताकि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
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