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हापुड़।
मकर संक्रांति की तिथि को लेकर भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा की सोमवार को नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा।
महासभा के अध्यक्ष केसी पांडेय ने बताया कि 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 4 मिनट पर सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेगा, जिसके साथ ही खरमास का समापन माना जाता है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के दिन ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस दिन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि रहेगी। इस अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का विशेष संयोग बनेगा। सुबह 8 बजकर 39 मिनट से पुण्यकाल आरंभ माना गया है, जो स्नान और दान के लिए शुभ रहेगा।
एकादशी तिथि होने के कारण कच्चे चावल का दान करना शास्त्रसम्मत बताया गया है। वहीं शाम 5 बजकर 53 मिनट के बाद एकादशी तिथि समाप्त होने पर खिचड़ी बनाने की परंपरा निभाई जा सकेगी।
मकर संक्रांति के दिन तिल और तिल से बने पदार्थों का दान, वस्त्र और स्वर्ण दान तथा शिवालयों में तिल के तेल का दीपक जलाना और हवन करना विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इन धार्मिक कार्यों से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पापों का नाश होता है।
बैठक में ओमप्रकाश पोखरियाल, आशुतोष शुक्ला, आदित्य भारद्वाज, अजय पांडेय, मित्र प्रसाद काफ्ले, ब्रजेश कौशिक, देवी प्रसाद तिवारी, अनिशा सोनी पांडेय, पंडित संतोष तिवारी सहित अन्य पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।



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