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गैस एजेंसियों पर भीड़, बाजार में इलेक्ट्रिक चूल्हों की कमी


HALCHAL INDIA NEWS

हापुड़। 

शहर में रसोई गैस सिलेंडर की कमी ने आम लोगों की रसोई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित कर दी है। गैस एजेंसियों पर लंबी-लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिलने से कई घरों में चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। मजबूरी में लोगों ने वैकल्पिक साधनों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है, जिसके चलते इलेक्ट्रिक चूल्हों की मांग अचानक बढ़ गई है। मांग बढ़ने से बाजार में इनकी कमी भी होने लगी है और कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक उछाल आ गया है।

स्थिति यह है कि जो इलेक्ट्रिक चूल्हा पहले करीब 1500 रुपये में मिल जाता था, अब वही 2500 से 2600 रुपये तक में बिक रहा है। मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर इसका दोहरा बोझ पड़ रहा है—एक ओर गैस नहीं मिल रही, दूसरी ओर विकल्प के तौर पर खरीदा जा रहा उपकरण भी महंगा हो गया है।

गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लोगों की भीड़ देखी जा रही है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि वे कई दिनों से सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लग रहे हैं, लेकिन हर बार निराश होकर लौटना पड़ रहा है। मजबूर होकर अब उन्होंने इलेक्ट्रिक चूल्हा खरीद लिया है ताकि घर में खाना बनाना जारी रखा जा सके। शहर के बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक दुकानों पर इन दिनों इलेक्ट्रिक चूल्हों की सबसे ज्यादा मांग है। कई दुकानों पर स्टॉक खत्म होने की स्थिति बन गई है। मोदीनगर रोड स्थित लक्ष्मी रेडियो के संचालक ने बताया कि गैस की कमी का सीधा असर उनके कारोबार पर भी पड़ा है, लेकिन मांग के अनुपात में माल उपलब्ध नहीं हो पा रहा।

उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों से अचानक इलेक्ट्रिक चूल्हों की बिक्री कई गुना बढ़ गई है। पहले दिनभर में एक-दो चूल्हे बिकते थे, लेकिन अब दर्जनों ग्राहक सिर्फ यही पूछने आ रहे हैं। कई कंपनियों का स्टॉक खत्म हो चुका है और नया माल महंगे दामों पर मिल रहा है। हमें भी ऊंचे दाम पर खरीदना पड़ रहा है, इसलिए ग्राहकों को सस्ता नहीं दे पा रहे। पहले जो चूल्हा 1500 रुपये का बिकता था, वही अब 2500 से 2600 रुपये तक पहुंच गया है। अगर गैस की समस्या जल्द दूर नहीं हुई तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।”


ग्राहकों ने भी अपनी परेशानी साझा की। एक महिला उपभोक्ता ने बताया कि छोटे बच्चों के कारण खाना बनाना जरूरी है, इसलिए मजबूरी में इलेक्ट्रिक चूल्हा खरीदना पड़ा। उन्होंने कहा, “हम तीन दिन तक गैस के लिए लाइन में लगे, लेकिन सिलेंडर नहीं मिला। घर में राशन होने के बावजूद खाना नहीं बन पा रहा था। आखिरकार महंगा होने के बावजूद इलेक्ट्रिक चूल्हा खरीदना पड़ा।” एक अन्य ग्राहक ने बताया कि बिजली का खर्च भी बढ़ेगा, लेकिन कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि गैस की कमी ने घरेलू बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। 

व्यापारियों का कहना है कि यदि गैस सिलेंडर की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो इलेक्ट्रिक उपकरणों की मांग और कीमतें दोनों बढ़ सकती हैं। फिलहाल शहर में गैस की किल्लत ने आम लोगों की दिनचर्या पर गहरा असर डाला है और रसोई व्यवस्था संकट में नजर आ रही है।