हापुड़।
स्वर्ग आश्रम रोड स्थित एक निजी अस्पताल में डिलीवरी के बाद बच्चा बदलने का आरोप लगने से हंगामा खड़ा हो गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया और मामले की जांच कर डीएनए टेस्ट कराने की मांग उठाई। सूचना मिलने पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।
पीड़ित सोनू गर्ग ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी को डिलीवरी के लिए नौ मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसी दिन डॉक्टर ने ऑपरेशन कर डिलीवरी कराई। आरोप है कि ऑपरेशन के बाद ओटी से बाहर आकर डॉक्टर ने परिवार को बधाई देते हुए बताया कि लड़का पैदा हुआ है। इसके बाद नर्सिंग स्टाफ ने भी परिवार को बधाई दी और मिठाई खिलाने तथा इनाम देने की बात कही।
परिवार के अनुसार बेटे के जन्म की सूचना मिलने पर उन्होंने अस्पताल में मौजूद रिश्तेदारों और नर्सिंग स्टाफ को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई और स्टाफ को इनाम भी दिया। आरोप है कि करीब एक घंटे बाद नवजात को परिवार के सुपुर्द किया गया। सोनू गर्ग के परिवार का कहना है कि 10 मार्च की सुबह बच्चे के रोने पर जब उसकी दादी ने कपड़े बदले तो पता चला कि नवजात लड़का नहीं बल्कि लड़की है। यह देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए और खुशी का माहौल अचानक असमंजस में बदल गया। इसके बाद परिजनों ने डिलीवरी कराने वाली डॉक्टर से बात की।
परिवार का आरोप है कि डॉक्टर ने उन्हें बताया कि रात में लड़की पैदा हुई थी और गलती से लड़का बता दिया गया। सोनू गर्ग ने आरोप लगाया कि 9 मार्च की रात ऑपरेशन के बाद अस्पताल के रजिस्टर में बच्चे का लिंग ‘मेल’ दर्ज किया गया था, लेकिन सुबह जब लड़की होने की बात सामने आई तो उसी रजिस्टर में ‘मेल’ के आगे ‘फी’ जोड़कर ‘फीमेल’ कर दिया गया। परिजनों का दावा है कि लिखावट और पेन की स्याही भी अलग-अलग नजर आ रही थी, जिससे शक और गहरा गया। परिवार का आरोप है कि इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा था। इसके बाद सोनू गर्ग ने डायल 112 पर सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और थाना देहात प्रभारी नीरज कुमार पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले की जानकारी ली और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू कर दिए।
इस मामले में डिलीवरी कराने वाली डॉक्टर ने बताया कि ऑपरेशन उन्होंने ही किया था, लेकिन नर्सिंग स्टाफ की जल्दबाजी और लापरवाही के कारण गलतफहमी पैदा हो गई कि लड़का पैदा हुआ है, जबकि जन्म लड़की का हुआ था। डॉक्टर ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी गलती से रजिस्टर में लड़का दर्ज हो गया था। उनका कहना है कि ऑपरेशन के बाद वह ओटी से बाहर आ गई थीं और बाद में नर्सिंग स्टाफ ने बिना ठीक से जांच किए लड़का होने की सूचना दे दी।
डॉक्टर ने कहा कि वह जांच में प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगी और नवजात लड़की ही पैदा हुई है। हालांकि परिवार डॉक्टर के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुआ और उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से शिकायत कर दी।
मामले की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अस्पताल पहुंची और जांच शुरू कर दी। वहीं परिजनों ने सच्चाई सामने लाने के लिए जिलाधिकारी अभिषेक पांडे से शिकायत की है और नवजात का डीएनए टेस्ट कराने की मांग की है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरे प्रकरण की जांच में जुटे हुए हैं।
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