HALCHAL INDIA NEWS
हापुड़।
बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन लोगों की सेहत पर उल्टा असर डाल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी आदतों के कारण शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है और सामान्य बीमारियों के इलाज में भी दवाएं असर नहीं कर पा रहीं।
स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीजों के मामलों की समीक्षा में यह सामने आया है कि कई लोगों पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी नहीं रह गई हैं। खासकर टाइफाइड जैसे संक्रमण में इलाज की अवधि बढ़ रही है और मरीजों को अपेक्षित समय में राहत नहीं मिल पा रही है।
डॉक्टरों के अनुसार, बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से शरीर के वे जरूरी तत्व प्रभावित होते हैं, जो बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। इसके चलते व्यक्ति बार-बार संक्रमण की चपेट में आ सकता है। कुछ मामलों में ज्यादा प्रभाव वाली दवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है, जिनके साइड इफेक्ट भी अधिक होते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई लोग गांवों और मोहल्लों में संचालित छोटे क्लीनिकों से बिना जांच के दवाएं ले लेते हैं, जिनमें अक्सर एंटीबायोटिक शामिल होती हैं। यह प्रवृत्ति स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक दवा केवल योग्य चिकित्सक की सलाह और उचित जांच के बाद ही लें। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को इस मामले में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इसका असर गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ सकता है।
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