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जी.एस. यूनिवर्सिटी में महिला सशक्तिकरण की हुंकार, राजनीति से ऊपर उठने की अपील


HALCHAL INDIA NEWS

हापुड़। 

महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जी.एस. विश्वविद्यालय में आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी की जिलाध्यक्ष श्रीमती कविता माधरे ने छात्राओं और महिला कर्मचारियों को संबोधित करते हुए महिलाओं की भूमिका और अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में उन्होंने महिला आरक्षण, परिसीमन और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को लेकर खुलकर अपने विचार रखे, जिससे उपस्थित छात्राओं में जागरूकता और उत्साह का माहौल देखने को मिला।


कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय पहुंचने पर जिलाध्यक्ष का स्वागत मुख्य सतर्कता अधिकारी मनोज शिशोदिया, उप निदेशक अंकित विज और एस.एन. सिंह ने किया। इसके बाद आयोजित संवाद कार्यक्रम में कविता माधरे ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाए बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पहले ही पारित किया जा चुका है, जो देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।


उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए परिसीमन की प्रक्रिया आवश्यक है, जिससे निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन हो सके और आरक्षण लागू किया जा सके। इसी संदर्भ में उन्होंने हाल ही में संसद में प्रस्तुत संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य महिला आरक्षण को शीघ्र लागू करने के लिए आवश्यक संवैधानिक और प्रक्रियात्मक व्यवस्था को आगे बढ़ाना था, लेकिन यह विधेयक आवश्यक विशेष बहुमत प्राप्त नहीं कर सका। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर समर्थन नहीं दिया, जिससे महिलाओं को उनका अधिकार मिलने में देरी हो रही है।

कविता माधरे ने अपने संबोधन में कहा, “महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प है, जिसे धरातल पर उतारना हम सभी की जिम्मेदारी है। जब तक महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक समाज में वास्तविक समानता स्थापित नहीं हो सकती। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन महिला आरक्षण जैसे विषय पर सभी दलों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें, लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझें और सक्रिय रूप से समाज व राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाएं। “आज की छात्राएं ही कल की नीति-निर्माता हैं, इसलिए जरूरी है कि वे शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता भी विकसित करें।

कार्यक्रम में छात्राओं और महिला कर्मचारियों ने भी विषय पर गहरी रुचि दिखाई और संवाद के माध्यम से अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर अमित टांक, सुमन गर्ग, सोनिया भारती, सीमा जौहर, रजनी और नरेश भारती सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ना रहा, जो सफलतापूर्वक पूरा होता नजर आया।