हापुड़।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जो माता-पिता से बच्चों में पहुंचती है। इस रोग में शरीर पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता, जिसके कारण मरीज में खून की गंभीर कमी हो जाती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वेदप्रकाश ने बताया कि थैलेसीमिया रक्त से जुड़ा विकार है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला प्रोटीन होता है, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है। इसकी कमी होने पर व्यक्ति को एनीमिया, कमजोरी, थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल जिला थैलेसीमिया रोग से मुक्त माना जा रहा है और विभाग के रिकॉर्ड में इस बीमारी का कोई मरीज दर्ज नहीं है। शासन स्तर पर जारी सूची में भी जिले का नाम शामिल नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग हर साल कम हीमोग्लोबिन वाले करीब 10 हजार लोगों की निगरानी करता है। समय-समय पर इनके सैंपल लेकर जांच की जाती है, ताकि थैलेसीमिया जैसे मामलों की समय रहते पहचान हो सके। इनमें बड़ी संख्या गर्भवती महिलाओं की होती है। विभाग द्वारा हर वर्ष करीब आठ हजार गर्भवती महिलाओं की जांच भी कराई जा रही है।
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