HALCHAL INDIA NEWS
हापुड़ जिले में परिवार नियोजन के तहत नसबंदी कराने वाली 43 महिलाओं के गर्भवती होने के मामले सामने आए हैं। इन सभी महिलाओं ने स्वास्थ्य विभाग के समक्ष आर्थिक सहायता के लिए दावा प्रस्तुत किया है। जांच और सत्यापन के बाद संबंधित प्रकरणों की फाइलें शासन स्तर पर भेज दी गई हैं।
बताया गया है कि इन महिलाओं के पहले से चार या उससे अधिक बच्चे हैं और जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से उन्होंने सरकारी अस्पतालों में नसबंदी कराई थी। इसके बावजूद गर्भधारण होने से उनके परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। महिलाओं का कहना है कि सीमित आय में पहले से ही परिवार का खर्च उठाना कठिन था और अब अनियोजित संतान से मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से नसबंदी, कॉपर-टी, अंतरा और छाया जैसे परिवार नियोजन के विभिन्न साधन उपलब्ध कराए जाते हैं। नसबंदी कराने पर तय प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में महिला नसबंदी के लक्ष्य तो पूरे हो जाते हैं, लेकिन पुरुष नसबंदी के मामले अपेक्षा से काफी कम रहते हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि एक अप्रैल 2019 से पहले नसबंदी विफल होने पर 30 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दिया गया। वर्तमान में 43 मामलों में आवेदन शासन को भेजे गए हैं। इनमें से 22 महिलाओं को एक किस्त का भुगतान किया जा चुका है, जबकि कुछ आवेदन अभी प्रक्रिया में हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील त्यागी ने बताया कि नसबंदी के बाद गर्भधारण से जुड़े मामलों में शासन की योजना के अनुसार महिलाओं को लाभ दिलाने की कार्रवाई की जा रही है।
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