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अर्द्धवार्षिक परीक्षा में छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों को मिला समान प्रश्नपत्र


HALCHAL INDIA NEWS

हापुड़। 

बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में बुधवार से अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं की शुरुआत हुई, लेकिन पहले ही दिन एक अनोखी स्थिति सामने आई। कक्षा छह, सात और आठ में पढ़ने वाले छात्रों को अलग-अलग कक्षाओं में होने के बाद भी एक जैसा प्रश्नपत्र दिया गया, जिसे देखकर शिक्षक भी हैरान रह गए। वहीं विभागीय अधिकारी इसे नियमों के अनुरूप बता रहे हैं।

पहले ये परीक्षाएं नवंबर के अंत में प्रस्तावित थीं, लेकिन एसआईआर की वजह से कार्यक्रम आगे बढ़ा दिया गया। बुधवार से कक्षा एक से आठ तक की परीक्षाएँ शुरू हुईं। पहले दिन कक्षा एक से पांच के बच्चों की मौखिक परीक्षा हुई, जबकि छठी से आठवीं के विद्यार्थियों की गृह शिल्प और कृषि विषय की परीक्षा ली गई।

सबसे अधिक चर्चा इस बात की रही कि तीनों ही कक्षाओं के छात्रों को एक ही प्रश्नपत्र दिया गया। गृह शिल्प का पेपर 50 अंकों का था, जिसमें बहुविकल्पीय, अति लघु, लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न शामिल थे। वहीं कृषि विषय का पेपर 35 अंकों का रहा, जिसमें बहुविकल्पीय, रिक्त स्थान, मिलान करो और विभिन्न स्तर के वर्णनात्मक प्रश्न शामिल थे।

शिक्षकों का कहना है कि निजी स्कूलों में इन कक्षाओं के पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्रों में बड़ा अंतर होता है, लेकिन यहाँ तीनों कक्षाओं के बच्चों को समान पेपर देना छात्रों की समझ के स्तर के अनुरूप नहीं लगता। पूर्णांक में अंतर (35 और 50 अंक) को लेकर भी कई शिक्षक असंतुष्ट दिखे, हालांकि अधिकारी इसे निर्धारित नियमों के मुताबिक बता रहे हैं।

डीसी अमित शर्मा के अनुसार, “कक्षा छह, सात और आठ का गृह शिल्प और कृषि का पाठ्यक्रम एक ही है। शिक्षा निदेशक की गाइडलाइन के अनुसार ही परीक्षा कार्यक्रम और प्रश्नपत्र तैयार किए गए हैं, इसलिए एक जैसा पेपर देना बिल्कुल सही है।”