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हापुड़ में चीनी मिलों पर किसानों का भारी बकाया, भुगतान व्यवस्था ध्वस्त


HALCHAL INDIA NEWS

हापुड़।

जिले की प्रमुख चीनी मिलें सिंभावली और ब्रजनाथपुर एक बार फिर गन्ना भुगतान को लेकर सवालों के घेरे में हैं। दोनों मिलों पर किसानों का पिछली पेराई अवधि का लगभग 130 करोड़ रुपये बकाया बताया जा रहा है। प्रशासन के साथ तय हुई मासिक भुगतान व्यवस्था भी अब पूरी तरह लड़खड़ा गई है, जिससे किसान आर्थिक दबाव में आ गए हैं।

जानकारी के अनुसार प्रशासन और मिल प्रबंधन के बीच हर माह 70 करोड़ रुपये भुगतान का समझौता हुआ था, लेकिन वर्तमान में इस राशि का आधा भी किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। हालात यह हैं कि चालू पेराई सत्र शुरू हुए डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी किसानों को एक भी किस्त नहीं मिली है, जबकि मिलों को बड़े पैमाने पर गन्ने की आपूर्ति की जा चुकी है।

बताया जाता है कि पूर्व में बनी भुगतान योजना से कुछ समय तक स्थिति में सुधार आया था और दो वर्ष पहले दिसंबर तक पूरा बकाया चुका दिया गया था। हालांकि, अब मिलों का संचालन आईआरपी के अधीन होने के बाद भुगतान की गति लगातार धीमी होती चली गई है। गन्ना विभाग भी इसे चिंता का विषय मान रहा है।

भुगतान में हो रही देरी का असर मिलों की कार्यक्षमता पर भी पड़ा है। इस सत्र में दोनों मिलों से दर्जनों गन्ना क्रय केंद्र हटाकर अन्य मिलों को सौंप दिए गए हैं, जिससे लगभग 65 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कम हो गई है। इसके बावजूद किसानों का पुराना बकाया जस का तस बना हुआ है।

आंकड़ों के मुताबिक नवंबर माह तक दोनों मिलों ने किसानों को केवल करीब 36 करोड़ रुपये का भुगतान किया है, जबकि चालू सत्र में अब तक लगभग 38 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा जा चुका है। इससे साफ है कि भुगतान और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।

जिला गन्ना अधिकारी बीके पटेल ने बताया कि विभाग किसानों के हित में लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि मिल प्रबंधन भुगतान व्यवस्था को सुधारने में असफल रहता है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।