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सीएचसी में सर्जन नहीं, जिला अस्पताल में भी विशेषज्ञों की कमी
हापुड़।
प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के प्रस्तावित दौरे से पहले जिले के सरकारी अस्पतालों में तैयारियों का माहौल है। भवनों की साफ-सफाई और व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। हापुड़ के सरकारी स्वास्थ्य संस्थान लंबे समय से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं।
जिले की आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में करीब डेढ़ से दो साल से एक भी जनरल सर्जन तैनात नहीं है। इसके चलते गंभीर मरीजों को या तो जिला अस्पताल भेजा जाता है या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। वहीं, जिला अस्पताल में भी महिला रोग विशेषज्ञों के पद खाली होने से सिजेरियन प्रसव जैसी जरूरी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
लगभग 20 लाख की आबादी वाले हापुड़ जिले में एक 100 बेड का जिला अस्पताल, 24 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 8 सीएचसी संचालित हैं। मानकों के अनुसार इन सभी संस्थानों में चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन अधिकांश पद लंबे समय से रिक्त हैं।
जिला बनने के बाद स्वास्थ्य भवनों और नई इकाइयों का निर्माण तो किया गया, मगर उन्हें सुचारू रूप से चलाने के लिए जरूरी मानव संसाधन की व्यवस्था नहीं हो सकी। नतीजा यह है कि गंभीर मरीजों को जिले में समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील त्यागी का कहना है कि सरकारी अस्पतालों की सेवाओं में पहले की तुलना में सुधार हुआ है। स्टाफ की कमी दूर करने के लिए शासन स्तर पर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। साथ ही डायलिसिस यूनिट और सीटी स्कैन जैसी सुविधाओं के प्रस्ताव भी स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष रखे जाएंगे।



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