हापुड़ में सिंभावली शुगर ग्रुप की चीनी मिलों से होने वाली बिक्री के 15 प्रतिशत हिस्से के इस्तेमाल को लेकर गन्ना विभाग और मिल प्रबंधन के बीच विवाद गहरा गया है। जिला गन्ना अधिकारी ने आशंका जताई है कि यह राशि तय मदों में खर्च न होकर दूसरी चीनी मिल में स्थानांतरित की जा सकती है। इसी संबंध में मिल प्रबंधन को नोटिस जारी कर खर्च का पूरा ब्योरा मांगा गया है।
बताया जा रहा है कि सिंभावली शुगर ग्रुप के संचालन के लिए आईआरपी के रूप में अनुराग गोयल की नियुक्ति की गई है। पेराई सत्र 2025-26 में समूह की चिलवारिया चीनी मिल शुरू नहीं हो सकी, जबकि सिंभावली और ब्रजनाथपुर मिलों का लगभग 70 लाख क्विंटल गन्ना दूसरे जिलों में भेज दिया गया। ऐसे में किसानों के गन्ना भुगतान का मुद्दा भी गंभीर बना हुआ है।
भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए तत्कालीन डीएम अभिषेक पांडेय ने पहले टैगिंग सीमा 85 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत और बाद में 100 प्रतिशत कर दी थी। हालांकि इस आदेश को आईआरपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां से फिलहाल 85 प्रतिशत सीमा बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अब गन्ना विभाग ने सवाल उठाया है कि चीनी बिक्री से मिलने वाले 15 प्रतिशत फंड का उपयोग आखिर किन कार्यों में किया जा रहा है। जिला गन्ना अधिकारी बीके पटेल का कहना है कि इस संबंध में दो बार नोटिस भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। विभाग को आशंका है कि राशि का इस्तेमाल दूसरी फैक्टरी में किया जा सकता है।
वहीं आईआरपी अनुराग गोयल का कहना है कि यह मिल प्रबंधन का आंतरिक मामला है और निर्धारित नियमों के तहत ही धनराशि खर्च की जा रही है। उनका कहना है कि इस मामले में जवाब न्यायालय में दिया जाएगा।
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